सब स्टेशन में बिजली कर्मियों के धरने को संबोधित करते संयुक्त संघर्ष समिति नेता।
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बांदा। निजीकरण के विरोध में गुरुवार को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में एकजुट बिजली कर्मियों ने ध्यानाकर्षण आंदोलन में धरना-प्रदर्शन किया। केंद्रीय ट्रेड यूनियन और श्रम संगठन भी इसमें शामिल रहे।
संघर्ष समिति नेताओं ने कहा कि निजीकरण का विरोध प्रदेश के सभी 15 लाख बिजली कर्मी और अभियंता कर रहे हैं। महामारी में भी राज्य सरकारें निजीकरण पर तुली हुई हैं। मांग की कि इलेक्ट्रिक सिटी एमेडमेंट बिल और निजीकरण स्टैंडर्ड बीडिंग डाक्यूमेंट निरस्त किए जाएं। वरना राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी।
उन्होंने किसानों और उपभोक्ताओं से इस आंदोलन में सहयोग की अपील की। कहा कि निजीकरण से सबसे ज्यादा नुकसान आम उपभोक्ताओं का होगा। अभी बिजली की लागत 7.90 रुपये प्रति यूनिट है। निजी कंपनियां 16 फीसदी मुनाफा लेंगी।
यानी 10 रुपये प्रति यूनिट कम से कम बिजली मिलेगी। धरना प्रदर्शन में समिति संयोजक पीयूष द्विवेदी सहित दक्षिणांचल अध्यक्ष आशुतोष दीक्षित, अतिरिक्त मंत्री एहसानुज्जमां, क्षेत्रीय मंत्री सुशील अग्रवाल, खंडीय अध्यक्ष सत्यप्रकाश आदि शामिल रहे।