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महानगर से लौटे आठ युवकों ने कराई जांच

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बांदा। जनता कर्फ्यू के बाद महानगरों से यहां लौट रहे बड़ी संख्या में युवाओं में कोरोना को लेकर काफी खौफ नजर आया। जुकाम-खांसी और बुखार से ग्रसित कई युवकों ने जिला अस्पताल पहुंचकर अपनी जांच कराई। ट्रेन और बसों का संचालन बंद होने पर सोमवार को झांसी और मानिकपुर से किराए का वाहन करके बड़ी संख्या में युवक शहर पहुंचे। ये सभी महाराष्ट्र, चेन्नई और दिल्ली से लौटे हैं। इनमें करीब 8 युवकों ने जिला अस्पताल में अपनी जांच कराई। उनके नाम-पते दर्ज कर लिए गए हैं। ट्रामा सेंटर चिकित्साधिकारी डॉ. विनीत सचान ने बताया कि उन्हें घर पर ही रहने की सलाह दी गई है। प्रथम दृष्टया वायरल के लक्षण पाए गए हैं।
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उधर, महानगरों से लौटे तीन मजदूरों की अतर्रा सीएचसी में जांच की गई। बेंदा गांव का एक युवक हैदराबाद से और खौड़ा गांव का युवक सूरत से लौटा था। इसी तरह परसौड़ा गांव का युवक वैष्णो देवी से लौटा है। तीनों को खांसी-जुकाम आदि की शिकायत थी। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा.नीरज सिंह पटेल ने मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया है।
उधर, पीएचसी के नेत्र परीक्षण अधिकारी शोभित कुमार ने बताया कि परदेस से किसी के भी लौटने पर ग्रामीण फोन पर तत्काल सूचना देते हैं। स्वास्थ्य कर्मी गांव में ही जाकर इसे देखते हैं। मामूली बीमारी पर वहीं इलाज कर दिया जाता है। हालांकि ग्रामीण उन्हें गांव से ले जाने का दबाव बनाते हैं। डा.सतीश ने बताया कि फिलहाल किसी को कोरोना के लक्षण नहीं मिले हैं।
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उधर, बिसंडा क्षेत्र के पुनाहुर गांव का युवक पुणे (महाराष्ट्र) से लौटा है। वह वहां नौकरी करता है। रविवार को शाम गांव पहुंचते ही किसी ने स्वास्थ्य विभाग को सूचना दे दी। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव आई और उसे बिसंडा पीएचसी ले गई। वहां उसे मलेरिया से ग्रस्त पाया गया। इलाज किया जा रहा है।
मॉस्क और सैनिटाइजर की कालाबाजारी
अतर्रा। यहां मेडिकल स्टोरों में मॉस्क और सैनिटाइजर की कालाबाजारी चल रही है। आवश्यक वस्तु अधिनियम में शामिल किए जाने की घोषणा के बाद भी यह नहीं रुक रहा। कोरोना से डरे लोग यह दोनों वस्तुएं खरीदने के लिए दवाओं के दुकान के चक्कर लगा रहे हैं। दोनों को ही कई गुना ज्यादा दामों पर बेचा जा रहा है। समाजसेवी राकेश गौतम मेजर, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अर्जुन मिश्रा, अमोल यादव आदि ने इस पर रोक लगाने की मांग की।
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