बुंदेलखंड में शनिवार को रोजाना की तरह जनजीवन सामान्य था। लोग दिनचर्या में व्यस्त थे। सड़कों पर चहल-पहल थी। दफ्तरों में कामकाज हो रहा था। जैसे ही घड़ी की सुई 11:40 पर आई, धरती डोल उठी। कुछ सेकेंड तो लोग समझ ही नहीं पाए।
किसी को लगा कि उसे चक्कर आ रहा है। कोई समझा पैर लड़खड़ा गए हैं। लेकिन लगातार हो रहे कंपन से यह समझने में चूक नहीं हुई कि यह भूकंप है।
देखते-देखते लोगों में अफरातफरी मच गई। बांदा, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट में लोग घरों, दफ्तरों से निकल कर सड़कों पर आ गए। स्कूलों में बच्चे भाग कर मैदान में जमा हो गए। अस्पताल में मरीजों को छोड़कर कई तीमारदार बाहर भाग खड़े हुए।
पहले 55 सेकेंड फिर 15 सेकेंड के झटके लगने के बाद धरती थमी। अभी लोग पूरी तरह सामान्य भी नहीं हो पाए थे कि 1.30 बजे फिर दूसरा झटका लगा। हालांकि यह बहुत मामूली था, फिर भी जिनको झटके महसूस हुए, वे फिर घरों-दफ्तरों के बाहर निकल आए।
इसके बाद पूरा दिन लोगों का दहशत और भूकंप की चर्चाओं के बीच गुजरा। ऐसे में अमर उजाला टीम हर घटना और हर माहौल पर अपनी पैनी नजर बनाए रही। पढ़िए कहां कैसा रहा माहौल।
बांदा में बबेरू प्रतिनिधि के मुताबिक भूकंप के झटके से नांदिन पुरवा (कुरैहा) गांव में जुग्गीलाल यादव के मकान की पहली मंजिल की छत धराशाई हो गई। घटना के समय छत के नीचे किसी के न होने से बड़ा हादसा टल गया। मकान मालिक का परिवार मकान के निचले भाग में था।
मकान के अन्य भाग में दरारें आ गईं। उधर, करतल प्रतिनिधि के मुताबिक पूर्व माध्यमिक विद्यालय, महराजपुर में भूकंप की थर्राहट से स्कूल भवन में दरारें आ गईं। कक्षाओं से बच्चे भाग कर सड़क पर निकल आए। लोग देर शाम तक एक-दूसरे को फोन करके भूकंप की जानकारी लेते-देते रहे।
चित्रकूट में राजापुर के बेराउर गांव से चिल्लीमल तक लगभग दो दर्जन गांवों में पौने बारह बजे के आसपास भूकंप के झटके महसूस किए गए। बेराउर गांव के बुजुर्ग लाल बहादुर सिंह ने बताया कि लगभग चालीस साल पहले इसी तरह के झटके महसूस किए गए थे।
सरैंया, मऊ, पहाड़ी, भरतकूप, शिवरामपुर आदि जगहों पर भी लोग भूकंप की चर्चा करते दिखे। उधर, गनीवां कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. नरेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में आए भूकंप की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर साढ़े चार रही।