अतर्रा तहसील के खम्हौरा गांव में दलित किसान का परिवार दोहरे सदमे से जूझ रहा है। 16 अप्रैल को सिर्फ 40 बरस की उम्र में किसान मिट्ठू रैदास फसल गंवाने का सदमा बर्दाश्त न कर सका और दिल का दौरा पड़ने से चल बसा। पिता की मौत की खबर पाकर राजस्थान के दौसा जिले में मजदूरी को गया युवा पुत्र वापस लौटते समय रास्ते से गुम हो गया। अब किसान मिट्ठूलाल की पत्नी और तीन मासूम बच्चे परेशान हैं।
मिट्ठू रैदास गांव के ही मुन्ना सिंह की चार बीघा जमीन बंटाई पर लिए था। इसमें खेती करने के अलावा बीच-बीच में पंजाब जाकर मजदूरी भी कर लेता था। यूं ही घर का खर्च चल रहा था। पिछले साल अपनी विकलांग बेटी की शादी के लिए रिश्तेदाराें और साहूकारों समेत करीब डेढ़ लाख रुपये कर्ज ले लिया। इस वर्ष फसल चौपट होने से कर्ज में डूबे मिट्ठूलाल को 16 अप्रैल को दिल का दौरा पड़ा और वह चल बसा।
कुदरत ने मिट्ठू के परिवार पर एक और दुख का पहाड़ तोड़ दिया है। मिट्ठू का पुत्र रामबाबू (19) दौसा (राजस्थान) में मजदूरी को गया हुआ था। पिता की मौत की सूचना 16 अप्रैल को ही उसे फोन से दी गई थी। वह उसी रात ट्रेन से गांव आने के लिए चल पड़ा।
कानपुर में ट्रेन से उतरकर वहां के झकरकटी बस अड्डे पहुंचने तक फोन पर उसकी लोकेशन पता चलती रही। इसके बाद फिर कुछ पता नहीं चला। फोन भी बंद है। पति की मौत और जवान बेटे की गुमशुदगी से माया देवी बेसुध हैं। तीन अन्य मासूम बच्चे भी मायूस हैं। गुमशुदगी की सूचना पुलिस को दी गई है। तलाश की जा रही है।