खेत में भालू के लेटने का निशान देखते ग्रामीण।
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बांदा शहर सीमा के गांव में भालू की दहशत से किसान खेत जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। खौफजदा किसानों ने खेत जाना ही छोड़ दिया है। उधर, सूचना के बाद भी वन विभाग की टीम गांव नहीं पहुंची। किसानों में वन विभाग के प्रति रोष है।
शहर से लगभग पांच किलोमीटर दूर बड़ोखर खुर्द गांव के सत्तिन हार में भालू नजर आने के बाद किसानों ने खेत जाना छोड़ दिया है। डरे-सहमे किसान खेत में खड़ी पकी फसल काटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। खास बात यह है कि भालू ने अब तक किसी पर हमला नहीं किया है।
खेतों में भालू के लेटने या बैठने से गेहूं की फसल भी चौपट हो रही है। दहशतजदा किसानों ने खेत जाना छोड़ दिया है। खेत में चारा काटने वाली महिलाओं ने तो अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। मवेशियों के सामने हरे चारे का संकट गहरा गया है।
गांव के कल्लू यादव, सत्येंद्र यादव, श्रीकृष्णा, दुर्जन, शिवमोहन सिंह, धनी, पूरन, फत्तू, दुर्गा आदि ने बताया कि पिछले एक माह से भालू क्षेत्र में घूम रहा है। सूरज ढलते ही भालू खेतों में खड़ी गेहूं की फसल में छिपा रहता है। भालू पूरी तरह वयस्क है। खेतों में किसानों द्वारा बनाई गई झोपड़ियां भालू ने तहस-नहस कर डाली हैं।
बताया कि बुधवार को दिन में करीब 8 बजे भालू को उन्होंने नजदीक से देखा है। खेत जाने पर ग्रामीण लाठी-डंडा आदि से लैस होकर ही जाते हैं। उधर, प्रभागीय वनाधिकारी प्रमोद कुमार गुप्ता का कहना है कि 20 दिन पूर्व ग्रामीणों की सूचना पर वन कर्मियों की टीम ने गांव का निरीक्षण किया था। पूरे क्षेत्र का भ्रमण करने के बाद कहीं भी भालू नजर नहीं आया। अब फिर नजर आया है तो वह वन कर्मियों की टीम गांव भेजकर भालू को पकड़ाने की कोशिश कराएंगे।