बुंदेलखंड में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए भूसा और पुआल की कटिया को भी पौष्टिक बनाया जाएगा। पशुपालन विभाग चारों जिलों में 1231 पशुपालकों का चयन कर उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। इसके लिए शासन ने पशुपालन विभाग को करीब 16 लाख रुपये अवमुक्त किए हैं। लघु एवं सीमांत किसानों को ही योजना का लाभ दिया जाएगा। लाभार्थी के पास दो दुधारू पशुओं का होना अनिवार्य है।
बुंदेलखंड में सूखा व दैवी आपदा से हरे व पौष्टिक चारे की भारी कमी हो रही है। इसका असर लगातार दुग्ध उत्पादन उत्पादन पर दिख रहा है। लेकिन शासन ने इसका उपाय खोज लिया है। अब पशुपालक के घर में ही सूखे भूसे और पुआल की कटिया पर प्रयोग होगा। इस अपौष्टिक चारे व सेल्यूलोजिक वेस्टेज को उपचारित कर पौष्टिक बनाया जाएगा। पहले चरण में एक ग्राम पंचायत में सिर्फ एक किसान (पशुपालक) का चयन किया जाना है।
वह लघु व सीमांत किसान हो। भूसा को पौष्टिक बनाने के लिए लाभार्थी को एक लोअर व एक अपर प्लास्टिक सीट, दस लीटर क्षमता का स्प्रिंकलर सेट मुफ्त दिया जाएगा। साथ ही पशुपालन विभाग की निर्देशिका भी दी जाएगी। इससे देखकर वह स्वत: भूसे को उपचारित कर पौष्टिक बना लेगा। बुंदेलखंड से सातों जिलों में 2905 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से 1231 ग्राम पंचायतों में एक-एक लाभार्थी का चयन किया जाएगा।
बांदा में 471 ग्राम पंचायतों में से 200, चित्रकूट में 335 ग्राम पंचायतों में से 142, हमीरपुर में 339 ग्राम पंचायतों में से 143 और महोबा जिले में 273 ग्राम पंचायतों में से 115 गांवों से एक-एक लाभार्थी का चयन होगा। इसी तरह झांसी मंडल में झांसी में 496 ग्राम पंचायतों में से 210, ललितपुर में 416 में से 176 और जालौन जिले में 575 ग्राम पंचायतों में से 245 ग्राम पंचायतों का चयन किया जाएगा।शासन ने इस योजना के तहत दो अलग-अलग मदों में धनराशि जारी की है।
एक में सामग्री खरीद होगी और दूसरे में अन्य खर्च शामिल हैं। बांदा जिले में 2,55,300 रुपये में 1,17,500 रुपये अन्य व्यय में और 1,37,800 रुपये सामग्री व संपूर्ति में खर्च होंगे। चित्रकूट जिले में 1,81,263 रुपये, हमीरपुर में 1,82,540 रुपये व महोबा जिले में 1,46,798 रुपये खर्च किए जाएंगे। जबकि झांसी जिले में 2,68,065, ललितपुर जिले में 2,24,664 और जालौन जिले में 3,12,743 रुपये इस योजना में व्यय होंगे।
वित्त नियंत्रक (पशुपालन विभाग उप्र) नरेंद्र प्रताप सिंह ने सभी मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों से कहा है कि लाभार्थी को उसके खाते में आरटीजीएस के जरिए धनराशि उपलब्ध कराई जाए। इस योजना का पैसा पशुपालक अन्य कामों में न खर्च करे, इस पर सीवीओ निगाह रखें।
अपौष्टिक भूसा और पुआल की कटिया को पौष्टिक बनाने के विधि बेहद सहज है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.लाखन सिंह ने बताया कि 40 लीटर पानी में 4 किलो यूरिया खाद का घोल बनाना होगा। एक कमरे में पहले प्लास्टिक सीट बिछानी होगी। उसके ऊपर लेयर बनाकर करीब एक कुंतल भूसा या पुआल की कटिया भरनी होगी।
इसके बाद भूसे को पैरों से कुचलकर विधिवत दबाएं ताकि वायु रहित परत हो जाए। बाद में अपर प्लास्टिक सीट ढक दें। सप्ताह भर या दस दिन बाद इसे एक किनारे से खोलें। भूसा निकालकर उसे खली व आटा आदि मिलाकर तैयार करें फिर पशुओं को डालें। इस पौष्टिक भूसे से करीब 20 से 30 फीसदी दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा।