गर्मी अभी परवान भी नहीं चढ़ी और बुंदेलखंड में पानी के लाले शुरू हो गए हैं। कुआं और तालाब सूखने और नदियों के पतली जलधारा में सिमटने के बाद अब चित्रकूटधाम मंडल के 13 बांधों से भी पानी नदारद हो गया है। हालात यह हैं कि बांधों में मात्र 4 से 15 फीसदी पानी बचा है। महोबा की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है।
चित्रकूटधाम मंडल में बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा जिलों में 13 बांध हैं। इन बांधों से सिंचाई विभाग पूरे साल नहरों के जरिये सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराता है। गर्मी में पशुओं को प्यास बुझाने के लिए तालाब भी इन्हीं बांधों के पानी से भरे जाते हैं।
आमतौर पर मई-जून में बांधों में पानी का संकट होता था, लेकिन इस बार मार्च में ही बांधों ने जवाब दे दिया है। सिंचाई विभाग के ताजे आंकड़ों में 13 बांधों में किसी में भी पर्याप्त पानी नहीं है। बांदा की नहरों और तालाबों को पानी मुहैया कराने वाले छतरपुर स्थित गंगऊ, रनगवां और बरियारपुर बांधों की स्थिति बेहद खराब है। बरियारपुर में पानी ही नहीं बचा।
रनगवां में सिर्फ चार फीसदी और गंगऊ में मात्र छह फीसद पानी है। इन्हीं बांधों से बांदा की मुख्य केन नहर प्रणाली संचालित होती है। बांधों के सूख जाने से सिंचाई विभाग ने नहर चलाने से भी हाथ खड़े कर दिए हैं।
चित्रकूट जिले में ओहन बांध, बरुआ बांध, गुंता बांध और रसिन बांध, हमीरपुर में मौदहा बांध और महोबा में अर्जुन बांध, चंद्रावल बांध, कबरई बांध, मझगवां बांध तथा उर्मिल बांधों की भी हालत खराब है। कबरई और मझगवां बांधों में कोई पानी नहीं बचा। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता का कहना है कि बारिश होने पर ही बांधों के हालात में बदलाव आएंगे।