प्रदेश सरकार के मंत्रियों की रविवार को उरई में की जा रही बुंदेलखंड पेयजल समस्या की समीक्षा पर बुंदेली बाशिंदों की निगाहें टिकी हुई हैं। चित्रकूटधाम मंडल में अरबों रुपये खर्च हो जाने के बाद भी तमाम योजनाएं पानी नहीं दे पा रहीं। खासकर पाइप पेयजल योजनाएं। मुख्यमंत्री की घोषणा वाली योजनाओं का भी हश्र आम योजनाओं की तरह हो रहा है। ये समय से पूरी नहीं हो रहीं।
प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास राज्यमंत्री डॉ. महेंद्र सिंह समेत कई मंत्री आज उरई में चित्रकूटधाम और झांसी मंडल के सातों जिलों की पेयजल योजनाओं की समीक्षा करेंगे। जलनिगम और जलसंस्थान ने कई नई योजनाएं पेश करने तैयारी की है, जबकि अधूरी योजनाओं को पूरा कर उन्हें चालू कर दिया जाए तो काफी हद तक पेयजल संकट से राहत मिल सकती है। बानगी के तौर पर चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय बांदा में अवस्थी पार्क स्थित जल संस्थान कार्यालय परिसर में वर्ष 2013 में बूस्टिंग पंप एवं सीडब्ल्यूआर (क्लियर वाटर रिजर्व) बनाने का काम शुरू हुआ था। यह योजना मुख्यमंत्री की घोषणा में शामिल थी। 59 लाख रुपये अवमुक्त हो गए। मार्च 2015 में परियोजना पूरी हो जानी थी, लेकिन निर्धारित वर्ष से तीन वर्ष अधिक हो जाने के बाद भी यह चालू नहीं हो पाई। इसमें 300 किलोलीटर का सीडब्ल्यूआर, 600 एलपीएम का पंपिंग प्लान और 0.90 किलोमीटर पाइप लाइन का काम हुआ है। जल निगम का कहना है कि कार्य प्रगति पर है।
चित्रकूटधाम मंडल में सबसे ज्यादा पानी संकट से जूझ रहे महोबा में भी जल निगम की पेयजल योजनाएं कछुआ चाल से चल रही हैं। त्वरित आर्थिक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत महोबा नगर पेयजल योजना (पाइप लाइन शिफ्टिंग) के लिए एक करोड़ रुपये स्वीकृत होकर जारी भी कर दिए गए थे। इसका काम अगस्त 2016 में शुरू हुआ। मार्च 2017 में पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन आज तक नहीं हो पाया। चित्रकूट जिले में सीतापुर पुनर्गठन पेयजल योजना के लिए एक करोड़ 31 लाख 28 हजार रुपये स्वीकृत हुए थे। इसमें एक करोड़ रुपये जल निगम को दे भी दिए गए। जल निगम ने पूरी राशि खर्च कर दी है। जनवरी 2016 से इस योजना पर काम चल रहा है। जुलाई 2017 में योजना पूरी होकर चालू हो जानी थी, लेकिन अब तक नहीं शुरू हो पाई। जल निगम को 31.28 लाख रुपये की शासन से दरकार है।
हमीरपुर जिले में राठ पेयजल योजना वर्ष 2016 में स्वीकृत होकर काम शुरू हुआ। शासन ने 94 करोड़ 34 लाख 78 हजार रुपये स्वीकृत किए और 10 करोड़ रुपये जारी भी कर दिए। जल निगम ने यह पैसा खर्च कर दिया है। यह योजना इस वर्ष दिसंबर में पूरी होनी है, लेकिन अभी टेंडर की फाइनल अनुबंध की कार्रवाई चल रही है। 10 माह में योजना पूरी होना मुमकिन नही है।
चारों जिलों के लिए दो अरब की बनाईं योजनाएं
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल को पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए जल निगम ने नई और पुरानी योजनाओं की फाइलें दुरुस्त कर ली हैं। इन्हें रविवार को उरई में मंत्रियों की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। जल निगम ने मंडल के चारों जिलों के लिए दो अरब रुपये से ज्यादा की योजनाएं बनाई हैं। बुंदेलखंड पैकेज से पांच-पांच करोड़ रुपये की योजनाएं बनाई गई हैं। इसके अलावा अरबों रुपये लागत वाली कई अन्य योजनाएं भी हैं।
चित्रकूटधाम मंडल जलनिगम अधीक्षण अभियंता एमसी श्रीवास्तव ने बताया कि बांदा शहर को चिल्ला घाट यमुना नदी से पाइप लाइन के जरिये जलापूर्ति की योजना को मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।
इसकी लागत 1.79 अरब रुपये है। महोबा के लिए आठ योजनाएं तैयार की गईं हैं। इनकी लागत लगभग 50 करोड़ रुपये है। हमीरपुर में राठ नगर पेयजल पुनर्गठन योजना में औदहा बांध से जलापूर्ति के लिए 65 करोड़ लागत वाली योजना बनाई गई है। इसका टेंडर हो गया है। चित्रकूट जिले में मऊ एवं बरगढ़ के लिए पाइप लाइन से जलापूर्ति की योजना है। लगभग 13 ओवरहेड टैंकों का निर्माण होगा। 13 गांवों में स्टैंड पोस्ट लगाए जा रहे हैं। यह काम अगले माह पूरा हो जाएगा। अधीक्षण अभियंता ने कहा कि भूजल संकट दिन-ब-दिन गहरा रहा है। ऐसे में पाइप लाइन परियोजनाओं पर ही जोर दिया जा रहा है।
बैठक से पहले दफ्तरों में खोले प्याऊ
बांदा। सभी सरकारी दफ्तरों के बाहर सार्वजनिक प्याऊ के निर्देश शासन ने दिए हैं। लेकिन रविवार को उरई में बुंदेलखंड में पेयजल समस्या पर मंत्रियों द्वारा की जा रही समीक्षा बैठक में इस आदेश का आनन-फानन अमल करवा दिया। शनिवार को जिला विकास अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार त्रिवेदी ने सभी उप जिलाधिकारियों, तहसील स्तरीय अधिकारियों, बीडीओ व अन्य ब्लाक स्तरीय अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा कि सभी सरकारी कार्यालयों के बाहर प्याऊ लगाने के निर्देश शासन द्वारा दिए गए हैं। शनिवार को ग्राम्य विकास मंत्री की अध्यक्षता में हो रही बैठक में इस बिंदु पर भी चर्चा होगी। जिला विकास अधिकारी ने उपरोक्त अधिकारियों से अनुरोध किया है कि अपने कार्यालय में आज ही प्याऊ लगवाए और इसकी सूचना उनके कार्यालय और कंट्रोल रूम को उपलब्ध कराएं। ब्यूरो