बांदा। रेलवे कालोनी में रह रहे रेलवे कर्मचारी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। रेलवे चिकित्सालय की जांच रिपोर्ट ने यह खुलासा किया है। जांच में पानी की क्लोरिनेशन का स्तर शून्य पाया गया है। दूसरी तरफ रेलवे अभियंता पानी को शुद्ध बता रहे हैं। बांदा रेलवे स्टेशन को ‘ए’ श्रेणी का दर्जा हासिल है। प्लेटफार्म नंबर एक में 42 और दो में 26 स्टैंड पोस्ट लगाए गए हैं। कुल 68 नलों की इन टोटियों में ट्रेनों के समय केन नदी और रेलवे के दो नलकूप तथा एक कुएं से पेयजल आपूर्ति की जाती है। रेलवे ने प्लेटफार्म नंबर दो के बाहर एक फिल्टर प्लांट लगा रखा है। उधर, नदी और नलकूपों से ही रेलवे कालोनी में जालपूर्ति की जाती है। जो पानी सप्लाई किया जा रहा है उसमें क्लोरीन नहीं मिलाई जा रही है। नतीजे में पानी प्रदूषित है। यात्रियों से लेकर रेल कर्मी तक रोजाना यही प्रदूषित पानी पी रहे हैं।
पानी के प्रदूषित होने का खुलासा रेलवे के ही चिकित्सालय की जांच रिपोर्ट में हुआ है। दो दिन पहले यहां के रेलवे अस्पताल से पानी का नमूना झांसी प्रयोगशाला भेजा गया था। अब प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। इसमें पानी में क्लोरीन शून्य पाई गई है। पानी प्रदूषित और सेहत के लिए खतरनाक बताया गया है। रेलवे अस्पताल के चिकित्सक राहुल उपाध्याय ने बताया कि दूषित पानी पीने से टाईफाइड, पीलिया, डायरिया, त्वचा रोग, खुजली, बुखार आदि का खतरा मंडराता रहा है। दूसरी तरफ रेलवे के वरिष्ठ खंड अभियंता (कार्य) एके श्रीवास्तव का कहना है कि पेयजल प्रदूषित नहीं है। उन्होंने कहा कि क्लोरिनेशन के लिए फिल्टर प्लांट है। समय-समय पर पानी की जांच कराई जाती है। स्टाक में फिटकिरी और ब्लीचिंग मौजूद है।