दहेज हत्या के मामले में पति, देवर व सास-ससुर को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10-10 हजार रुपये जुर्माना भी किया है।
कर्वी कोतवाली क्षेत्र के पहरा (चित्रकूट) गांव निवासी राजकिशोर पुत्र सल्दू ने बिसंडा थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि उसने अपनी पुत्री कुसुमिया (22) का विवाह 4 जून 2006 को घूरी (बिसंडा) गांव निवासी रामचंद्र के पुत्र विशंभर के साथ किया था। शादी के बाद ससुरालीजन दहेज की मांग को लेकर पुत्री का उत्पीड़न करने लगे।
सास संपत, ससुर रामचंद्र और देवर रमेश व लल्लू ने 17 दिसंबर 2012 को उसकी बुरी तरह पिटाई की और पति ने आग लगाकर जला दिया। जिला अस्पताल से उसे मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया। मृतका ने झांसी में इलाज के दौरान मजिस्ट्रेट को दिए बयान में सास, ससुर और देवरों के खिलाफ पिटाई और पति के विरुद्ध आग लगाने की पुष्टि की।
बाद में उसकी मौत हो गई। तृतीय अपर जिला न्यायाधीश सुनील श्रीवास्तव की अदालत में सुनवाई के दौरान सहायक शासकीय अधिवक्ता विमल सिंह ने आठ गवाह पेश किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने बुधवार को सुनाए फैसले में सभी अभियुक्तों को धारा 302/34 आईपीसी में आजीवन कारावास व प्रत्येक को 10-10 हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया।
जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित होगी। एक अभियुक्त लल्लू (देवर) की मुकदमे की दौरान मौत हो चुकी है।
दुराचार में सात साल की कैद
बांदा। दुराचार के मामले में अभियुक्त को सात साल की कैद व 20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया। बबेरू कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की पीड़िता ने दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि 23 अगस्त 2011 की रात वह घर में खाना बना रही थी। घर के पीछे से सोहनलाल घर में घुस आया और उसके साथ दुराचार किया। चिल्लाने पर सास आ गई। आरोपी धक्का देकर भाग निकला।
पुलिस ने जांच के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अपर जिला जज (प्रथम) बृजलाल चौरसिया की अदालत में सुनवाई के दौरान सहायक शासकीय अधिवक्ता मूलचंद्र कुशवाहा ने चार गवाह पेश किए। बुधवार को न्यायाधीश ने अभियुक्त को सात साल सश्रम कैद व 20 हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने पर चार माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। जुर्माने की आधी रकम पीड़िता को और आधी रकम राजकोष में जमा होगी।