बांदा। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार को डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन के चलते स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं। हड्डी रोग विभाग के संविदा असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनीत सिंह के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के विरोध में संविदा प्रोफेसरों और जूनियर डॉक्टरों ने देर रात से ही मरीज देखना बंद कर दिया। सुबह होते-होते स्थिति और बिगड़ गई, जब डॉक्टरों ने इमरजेंसी वार्ड के गेट पर ताला डालकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
डॉक्टरों के इस कदम से अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। दूर-दराज से आए मरीज इलाज के लिए भटकते नजर आए। इमरजेंसी सेवाएं बंद होने के कारण कई गंभीर मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ा। इसी बीच इलाज के अभाव में इमरजेंसी में भर्ती शहर कोतवाली के पड़ई गांव निवासी 28 वर्षीय रामजी साहू, जो जहर खाने के चलते इलाज के लिए भर्ती किया था। उसकी देर रात मौत हो गई।
मृतक युवक के चाचा राकेश साहू ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने जानबूझकर इलाज नहीं किया, जिससे मरीज की जान चली गई। उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की। बताया गया है कि शहर कोतवाली क्षेत्र के पडुई निवासी अनिल कुमार की पांच वर्षीय बेटी मानवी के इलाज में लापरवाही को लेकर मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनीत सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
इसी के विरोध में डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से काम बंद कर दिया। इमरजेंसी गेट पर ताला लगाकर प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि बिना जांच के एफआईआर दर्ज करना गलत है और इससे चिकित्सकों का मनोबल टूट रहा है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अनावश्यक कार्रवाई वापस ली जाए, तभी वे काम पर लौटेंगे।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने स्थिति को संभालने की कोशिश की लेकिन बात न बनने पर पुलिस को बुलाना पड़ा। तकरीबन तीन घंटे बाद डॉक्टरों ने इमरजेंसी गेट का ताला खोलकर विरोध-प्रदर्शन बंद किया। वहीं तीन घंटे तक चलते विरोध के चक्कर में तमाम मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मौत का हड़ताल से नहीं है कोई लेना-देना
बांदा। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. सुनील कौशल का कहना है कि जहर खाने से भर्ती मरीज का इलाज किया गया है। हालत गंभीर होने पर मरीज ने आईसीयू में दम तोड़ा है। वहीं आरोपी डॉ. विनीत सिंह के बयान आज दर्ज होने थे, जो विरोध-प्रदर्शन के चलते दर्ज नहीं हो पाएं हैं। हालांकि प्रदर्शन खत्म हो गया है और काम सामान्य रूप से चालू करा दिया है।
पैनल में कई लोग होते हैं फिर कार्रवाई मुझ पर ही क्यों
बांदा। आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनीत सिंह ने बताया कि पैनल में कई डॉक्टरों की टीम होती है लेकिन कार्रवाई मुझ पर ही की गई, क्योंकि मैं संविदा पर हूं। जांच टीम ने मुझे यह तक नहीं बताया कि मेरी गलती कहां है और जांच रिपोर्ट भी नहीं दी गई। यह कार्रवाई मुझे फंसाने के लिए की जा रही है।
आधे घंटे से अंदर नहीं जाने दे रहे हैं डॉक्टर
बांदा। बबेरू क्षेत्र के गड़ांव निवासी शिवपूजन हाथ की अंगुलियां सुन्न होने पर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे, जहां पर प्रदर्शन के चलते डॉक्टरों ने अंदर नहीं जाने दिया। मरीज कई बार इलाज की गुहार लगाता रहा और दूर से आने का वास्ता देता रहा लेकिन उसे लंबा इंतजार करने बावजूद जब अंदर नहीं जाने दिया तो हार कर घर लौट गया।
फोटो- 39 मेडिकल काॅलेज की इमर्जेंसी वार्ड के गेट पर ताला जड़ बाहर बैठकर प्रदर्शन करते डॉक्टर। स
फोटो- 39 मेडिकल काॅलेज की इमर्जेंसी वार्ड के गेट पर ताला जड़ बाहर बैठकर प्रदर्शन करते डॉक्टर। स
फोटो- 39 मेडिकल काॅलेज की इमर्जेंसी वार्ड के गेट पर ताला जड़ बाहर बैठकर प्रदर्शन करते डॉक्टर। स