बांदा। बुलंदशहर में सरकारी डाक्टर के खिलाफ की गई
कार्रवाई से यहां के सरकारी डाक्टर भी भड़क गए हैं। प्रांतीय चिकित्सा सेवा
संघ (पीएमएसए) ने आपात बैठक कर चेतावनी दी कि सरकारी डाक्टरों के प्रति यह
रुख अपनाया गया तो खामोश नहीं बैठेेंगे। आंदोलन छेड़ेंगे। इससे जो हालात
पैदा होंगे, शासन उसके लिए जिम्मेदार होगा।
बुधवार को जिला अस्पताल
के आयुष भवन में पीएमएसए, बांदा यूनिट की आपात बैठक हुई। स्थानीय सचिव डा.
एसके वाजपेई ने बताया कि बैठक में बुलंदशहर का मामला छाया रहा। वहां
इंजेक्शन लगाए जाने से मरीज की हालत बिगड़ने पर सरकारी चिकित्सक डा. सचिन
के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर उन्हेें जेल भेज दिया गया।
संघ सदस्यों
ने इसे गैर कानूनी बताते हुए कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की। साथ
ही चेतावनी दी कि किसी भी सरकारी चिकित्सक के खिलाफ शासन ने इस तरह की
कार्रवाई की तो डाक्टर आंदोलन करेंगे। बैठक में तय किया गया कि बुलंदशहर
मुद्दे को लेकर दो नवंबर को पीएमएसए विरोध दिवस मनाया गया।
इस दिन
डीएम के माध्यम से शासन को ज्ञापन भेजा जाएगा। सदस्यों का कहना है कि सरकार
द्वारा सप्लाई किए गए किसी इंजेक्शन से मरीज को रिएक्शन हुआ है तो इसमें
डाक्टर का क्या कुसूर? लेकिन बुलंदशहर में डाक्टर की लापरवाही बताते हुए
प्रदेश सरकार की मंजूरी के बगैर डाक्टर के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेज
दिया गया।
बैठक में सचिव डा. एसके वाजपेई सहित सीएमएस डा. एसएन
गुप्ता, डा. टीआर सरसैया, डा. एसपी गुप्ता, डा. मुकेश कुमार, डा. अनुराग
श्रीवास्तव, डा. आरके गुप्ता, डा. संतोष चौधरी, डा. टंडन भी शामिल रहे।