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भूजल से नहीं, बारिश के पानी से करें सिंचाई

Thu, 12 Jul 2018 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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कृषि विश्वविद्यालय में निरीक्षण करतीं इजराइली टीम के महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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बुंदेलखंड में गिर रहे भूजल स्तर को संवारने में मदद के लिए आगे आए देश इजराइल की पांच सदस्यीय टीम ने बुधवार को यहां हालात का जायजा लिया। मंडलायुक्त के साथ बैठक की और कृषि विश्वविद्यालय में खेत-तालाब योजना के तहत बनाए गए तालाबों का निरीक्षण किया। बुंदेलखंड के किसानों को जोर दिया कि खेत की सिंचाई भूजल से न करें। इसके लिए बारिश का पानी संजो कर इस्तेमाल करें। 

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टीम में शामिल अदीना स्ट्रेला डार, तामर मिछले जिव, ओडेड डिस्टल, अवि हर्पज और येजिकल लिफिज ने मयूर भवन सभागार में मंडलायुक्त शरत कुमार सिंह के साथ बैठक की। डीएम डीपी गिरि सहित अन्य उच्चाधिकारी भी शामिल रहे। आयुक्त श्री सिंह ने कहा कि मंडल में जल संरक्षण के लिए खेत तालाब योजना के तहत बड़ी संख्या में तालाब खुदवाए गए हैं। साथ ही टपक सिंचाई अपनाने को किसानों को प्रेरित किया जा रहा है।

उन्होंने इजरायली टीम के साथ विचार साझा किए। कृषि विश्वविद्यालय, बांदा के कुलपति डॉ.एसएल गोस्वामी ने कहा कि जल संरक्षण में सरकारी प्रयास हो रहे हैं, पर इसमें आम जन की सहभागिता बढ़ाने की जरूरत है। विश्वविद्यालय द्वारा ऐसे ऐसी प्रजातियों के बीच विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें सिंचाई की जरूरत कम पड़ेगी।
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डीएम डीपी गिरि ने कहा कि इजरायल तकनीक बुंदेलखंड क्षेत्र में बेहद उपयोगी साबित होगी। बुंदेलखंड के कार्यक्रम लीडर युवराज अहूजा ने किसानों से कहा कि भूगर्भ जल के बजाए वे वर्षा संचित जल से सिंचाई करें। वाटर रिसोर्स ग्रुप 2030 के वरिष्ठ सलाहकार अनिल सिन्हा व जखनी गांव के प्रगतिशील किसान उमाशंकर पांडेय ने जखनी गांव में जल संरक्षण के बारे में जानकारी दी।  

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