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बुंदेलखंड में घट रही है आबादी की रफ्तार

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अमर उजाला ब्यूरो
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बांदा। बुंदेलखंड में सिर्फ फसल ही कम नहीं हो रही बल्कि आबादी का ग्राफ भी घट रहा है। पिछले करीब दो दशकों की जनसंख्या के आंकड़े यही दर्शा रहे हैं। वर्ष 1991 से वर्ष 2001 के दशक में हुई 6वीं जनगणना में जहां बुंदेलखंड में आबादी बढने का अंतर/ग्रोथ 17 से 34 प्रतिशत तक था वहीं वर्ष 2001 से वर्ष 2011 के दशक में हुई 7वीं जनगणना में यह ग्राफ घटकर पांच से 19 फीसदी पर आ गया। बुंदेलखंड के सातों जिलों में आबादी की रफ्तार पर लगाम लगी है। इसमें महोबा अव्वल है। यहां एक दशक में मात्र 2.67 प्रतिशत आबादी बढ़ी। जालौन में सर्वाधिक 14.23 फीसदी जनसंख्या बढ़ी है। आबादी नियंत्रण के लिए की जा रहीं सरकारी और गैरसरकारी कोशिशों का बुंदेलखंड में सकारात्मक असर नजर आ रहा है। आंकड़े इसके गवाह हैं। आबादी बढ़ने के ग्राफ में कमी आई है। विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई) को एक बार फिर आबादी पर लगाम लगाने की प्रेरणा देने वाले आयोजनों की तैयारी है।
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बुंदेलखंड में दो दशकों की जनगणना में जनसंख्या के आंकड़े-
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जनपद 2001 2011
बांदा 1537344 1799541
चित्रकूट 766225 990626
हमीरपुर 1043801 1104021
महोबा 708447 876055
जालौन 1454452 1610718
झांसी 1744931 2000755
ललितपुर 977734 1218002
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बुंदेलखंड में दो दशकों में आबादी बढ़ने का प्रतिशत
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जनपद 1991 से 2001 2001 से 2011
बांदा 18.49 14.57
चित्रकूट 34.33 22.65
हमीरपुर 17.85 5.45
महोबा 21.80 19.13
जालौन 27.17 12.94
झांसी 23.23 12.79
ललितपुर 30.0 19.73
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आबादी पर सबसे ज्यादा लगाम महोबा में
बांदा। दो जनगणनाओं के बीच सबसे कम 2.67 प्रतिशत आबादी महोबा में बढ़ी। बांदा में 3.92, चित्रकूट में 11.68, जालौन में 14.23, झांसी में 10.44, हमीरपुर में 12.40 और ललितपुर में 10.25 प्रतिशत आबादी बढ़ी है। ब्यूरो
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-दो दशकों की जनसंख्या के आंकड़े
-2001 में 34 फीसदी तक बढ़ी थी आबादी
-2011 में 19 प्रतिशत पर लग गया ब्रेक
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