नवाब टैंक के घाटों पर सफाई कर्मियों द्वारा निकालकर फेंकी गई घास।
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बांदा। ऐतिहासिक नवाब टैंक की सफाई में डीएम के फावड़ा संभालते ही घाटों का कचरा फेंकने में तन-मन से जुट गए अधिकारी और कर्मचारी डीएम के पीठ फेरते ही नदारद हो गए। सफाई का काम अधूरा रह गया। घाटों पर पानी से निकाली गई घास के ढेर लगे हैं। उनमें सड़ांध फैलने लगी है। नगर पालिका के मुट्ठी भर सफाई कर्मी चंद घंटे सफाई की रस्म अदायगी कर चले जाते हैं।
तीन दिन पहले डीएम योगेश कुमार खुद नवाब टैंक की सफाई में जुट गए थे। उनके हाथ में फावड़ा और घाटों का कचरा देखा तो उनके इर्दगिर्द मौजूद अधिकारियों को भी शर्म आ गई। वे भी सफाई में जुट गए। नगर पालिका और पंचायती राज विभाग के सफाई कर्मियों की लंबी फौज भी जुटी नजर आई।
इस दिन युद्ध स्तर पर सफाई का काम चला, लेकिन कई सालों से सफाई न होने से गंदगी से पटे पड़े तालाब में यह एक दिन की सफाई नाकाफी थी। उधर, डीएम का काफिला तालाब से विदा हुआ और सफाई का काम भी ठप हो गया। अब हालत यह है कि सिर्फ रस्म अदायगी हो रही है। पानी से निकाली गई घास और कचरा घाटों पर पड़ा हुआ सड़ांध मार रहा है। स्नान करने आने वालों को नाक में कपड़ा रखना पड़ रहा है।
गुरुवार को दोपहर 12 बजे नगर पालिका के गिनेचुने सफाई कर्मी सफाई की रस्म अदायगी करते रहे। पंचायती राज विभाग का एक भी सफाई कर्मी नजर नहीं आया। लोगों ने बताया कि सफाई कर्मी सुबह मात्र घंटेभर के लिए आकर रस्म अदायगी करके चले जाते हैं। उधर, इस बारे में नगर पालिका सफाई निरीक्षक हरीशंकर निरंजन ने कहा कि रमजान के मद्देनजर शहर के अन्य इलाकों में भी विशेष सफाई चल रही है। ऐसे में सफाई कर्मियों को खाली नवाब टैंक के अलावा शहर में भी लगाना पड़ रहा है।