बांदा। प्रदेश के कई शहरों में हिंसा और शुक्रवार को जुमा की नमाज के बाद जामा मस्जिद के सामने कुछ देर तक लगाए गए सीएए और एनआरसी विरोधी नारों के बाद मंडल मुख्यालय बांदा शहर में सुरक्षा के जबरदस्त इंतजाम किए गए हैं। शुक्रवार से ही जनपद के कई थानों का फोर्स और स्थानीय पुलिस संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दी गई। प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं।
शुक्रवार की पूरी रात पुलिस ने शहर में गश्त किया। रेलवे स्टेशन सहित मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस तैनात रही। पुलिस अधीक्षक खुद भी आधी रात को फोर्स के साथ अलीगंज चौकी से आसपास के इलाकों में गश्त पर निकले। शनिवार को शाम एसपी की अगुवाई में एक सैकड़ा से ज्यादा पुलिस कर्मियों का फ्लैग मार्च निकाला गया। एडीएम संतोष बहादुर सिंह, अपर एसपी एलबीके पाल, क्षेत्राधिकारी आलोक मिश्रा (नगर), राघवेंद्र प्रताप सिंह (सदर), राजीव प्रताप सिंह (अतर्रा), ओमप्रकाश (पैलानी) सहित शहर कोतवाली, मटौंध, बबेरू, बदौसा आदि थानों का फोर्स भी शामिल रहा।
खासकर मुस्लिम इलाकों में पुलिस की ड्यूटी और गश्त हो रहे हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिस की यह गतिविधियां शांति व्यवस्था को भंग करने वालों के लिए चेतावनी और अमन पसंद बाशिंदों को सुरक्षा का एहसास दिलाने के लिए किया जा रहा है। उधर, शुक्रवार को प्रदर्शन के बाद पूरे शहर में कहीं कोई प्रदर्शन इत्यादि नहीं हुआ। जनजीवन सामान्य रहा है।
सीएए के विरोध में अधिवक्ताओं का प्रदर्शन
बबेरू। नागरिकता संशोधन एक्ट और एनआरसी का विरोध करते हुए यहां तहसील अधिवक्ता संघ के अधिवक्ताओं ने शनिवार को प्रदर्शन करते हुए दोनों कानूनों को वापस लेने की मांग की। कहा कि यह द्विराष्ट्र सिद्धांत पर आधारित है। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी महेंद्र प्रताप को सौंपा। कहा कि दोनों कानून संविधान विरोधी हैं। किसी राष्ट्र की संकल्पना जाति या धर्म के आधार पर संभव नहीं है। राष्ट्रहित में दोनों कानूनों को वापस लिया जाए। प्रदर्शन में अधिवक्ता रामनिवाज, रामप्रताप वर्मा, खगेंद्र वर्मा, भूपतबाबू पटेल, शिवप्रसाद धुरिया आदि शामिल रहे।