बांदा। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हासिल करने के
बाद सत्तारूढ़ दल सपा ने अब ब्लाकों में भी अपना झंडा गाड़ने की कोशिशें
शुरू कर दी हैं।
सपा इस चुनाव को 2017 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर
देख रही है। उधर, भाजपा, बसपा और कांग्रेस में भी चुनाव को लेकर
सरगर्मियां शुरू हो गई हैं।
जिले में आठ ब्लाक हैं। 28 जनवरी को
ब्लाक प्रमुख के चुनाव की घोषणा हो चुकी है। सपा आधे से ज्यादा सीटों पर
अपने प्रत्याशियों के निर्विरोध जीतने का दावा कर रही है।
सपा ने
प्रदेश नेतृत्व को 18 नामों का प्रस्ताव भेजा है। उधर, भाजपा और बसपा भी कई
ब्लाकों में अपना प्रमुख जिताकर परचम लहराने की जुगत में हैं। कांग्रेस
अभी तक ब्लाक प्रमुखी चुनाव मामले में पूरी तरह चुप्पी साधे है।
पिछड़ा
वर्ग के लिए आरक्षित तिंदवारी ब्लाक से सपा प्रत्याशी के रूप में बबेरू
विधायक विशंभर यादव की बहू अंकिता यादव का चुनाव लड़ना तय माना जाना रहा
है।
सामान्य सीट जसपुरा से सपा जिला सचिव कुदरत उल्ला की बहू
सादिका खातून का नाम नंबर एक पर है। बड़ोखर ब्लाक सामान्य सीट पर सपा से
तीन नाम चल रहे हैं।
इनमें चर्चित हत्याकांड में आरोपी रहे सपा
नेता के भाई शेखर शर्मा का नाम ऊपर है। रामऔतार भाऊ व छात्र नेता निर्भय
सिंह मोंटी भी यहां से दावेदारी पेश कर चुके हैं।
महुआ ब्लाक में
सपा से मंगल सिंह यादव या फिर शशि यादव चुनाव लड़ सकती हैं। नरैनी ब्लाक से
अवधेश सिंह व आरती यादव के नामों की चर्चा है।
अनुसूचित जाति के
लिए आरक्षित कमासिन ब्लाक में सपा से चंदा देवी, नीलम देवी, मिथलेश कुमारी
दावेदार हैं। बबेरू ब्लाक में सुमन देवी तो बिसंडा में कलमतिया, प्रीती
सिंह व कल्पना त्रिपाठी सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ना चाहती हैं।
सपा
जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी ने बताया कि दो-तीन दिन में प्रदेश अध्यक्ष से
स्वीकृत मिलते ही प्रत्याशियों की स्थिति साफ हो जाएगी। दावा किया कि चार
ब्लाकों में उनके प्रत्याशी निर्विरोध ब्लाक प्रमुख बनेंगे।
उधर,
भाजपा जिलाध्यक्ष आईपी सिंह पटेल ने बताया कि अभी किसी ब्लाक से
प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि भाजपा सभी
ब्लाकों में प्रत्याशी खड़ा करेगी।
उधर, बसपा जिलाध्यक्ष प्रदीप
कुमार वर्मा का कहना था कि प्रमुखी चुनाव में उनकी पार्टी पूरे दमखम से
चुनाव लड़ेगी और जीतेगी। अभी प्रत्याशियों के नामों पर फैसला नहीं हुआ है।
ब्लाक
प्रमुखी के चुनाव में भी पावर और प्रलोभन गुल खिलाएगा। इसकी शुरुआत हो
चुकी है। नाम न छापने की शर्त पर कई क्षेत्र पंचायत सदस्यों (बीडीसी) ने
बताया कि जिला पंचायत की तर्ज पर क्षेत्र पंचायत सदस्यों को भी अपने पाले
में लाने के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
जसपुरा और पैलानी क्षेत्रों
में तो सदस्यों पर पुलिस के जरिये बंद लफ्जों में खबरदार किया जा रहा है।
अप्रत्यक्ष रूप से धौंस धमकी भी मिल रही है।