बांदा। समाजवादी पार्टी को बांदा में जिला पंचायत
अध्यक्ष उम्मंीदवार घोषित करने में पसीने छूट रहे हैं। पार्टी हाईकमान ने
जहां चित्रकूट धाम मंडल के तीनों जिलों में अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए
हैं वहीं बांदा को लेकर पशोपेश की स्थिति में है।
राजनीतिक
गलियारों में चर्चा है कि बालू कारोबारियों और सपा विधायक की दावेदारी से
यहां का मामला पेचीदा हो गया है। दावेदार सपा नेताओं ने लखनऊ में डेरा डाल
रखा है। एक-दो दिन यानी शुक्रवार या शनिवार तक प्रत्याशी घोषित होने की
संभावना है।
सपा हाईकमान ने चित्रकूटधाम मंडल के चित्रकूट,
हमीरपुर और महोबा में जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए अपने प्रत्याशी घोषित कर
दिए हैं, लेकिन मंडल मुख्यालय बांदा में सपा मुखिया नाम फाइनल नहीं कर सके।
पिछले माह सपा प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने
अध्यक्ष पद के इच्छुक उम्मीदवारों से आवेदन मांगे थे। बांदा से मात्र चार
जिला पंचायत सदस्यों दीपा सिंह गौर, गीता सिंह, अंजना सिंह और प्रीति साहू
ने आवेदन किया। सबसे मजबूत और चर्चित दावेदार विधायक विशंभर सिंह यादव की
पत्नी ने आवेदन नहीं किया।
विधायक की पत्नी रमा यादव जिला पंचायत
सदस्य हैं। लेकिन उनका आवेदन न करना लोगों को हैरत कर रहा है। आवेदन न करने
के सवाल पर विधायक का कहना था कि अगर हाईकमान उन्हें इस योग्य समझता है तो
प्रत्याशी बनाए।
आवेदन इसलिए नहीं किया कि पार्टीजनों को यह न लगे
कि उनकी हकतल्फी की जा रही है। अब जबकि अध्यक्ष चुनाव के लिए अधिसूचना भी
जारी हो चुकी है फिर भी सपा हाईकमान बांदा में प्रत्याशी का नाम तय नहीं कर
पाई है।
जिन चार सदस्यों ने आवेदन किया है उनमें बालू कारोबारी व
सपा नेता बच्चन सिंह की बहू गीता सिंह भी शामिल हैं। इनके अलावा वरिष्ठ सपा
नेता अशोक सिंह गौर की पत्नी दीपा सिंह गौर ने भी आवेदन किया है।
दो अन्य आवेदकों में अंजना सिंह व प्रीति साहू शामिल हैं। चर्चाओं में यह बात चल रही है कि अध्यक्ष का चुनाव काफी खर्चीला है।
ऐसे
में पैसे के साथ पावर की भी खास भूमिका रहेगी। सूत्रों की मानें तो टिकट
फाइनल कराने के लिए यहां के अधिकांश सपा नेता और टिकट मांगने वाले सपाई
सदस्य लखनऊ में कई दिनों से डेरा डाले हैं।
ये पार्टी मुखिया
मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव से मिले हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश
यादव से भी मिलने की जुगत भिड़ा रहे हैं। गुुरुवार को मुख्यमंत्री के लखनऊ
से बाहर होने पर मुलाकात नहीं हो सकी। उम्मीद है कि शुक्रवार या शनिवार तक
प्रत्याशी घोषित कर दिया जाएगा।
खुलकर किसी राजनैतिक दल में सक्रिय
नजर न आने वाले यहां के एक बड़े बालू कारोबारी ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद
के उम्मीदवारों की नींद हराम कर रखी है।
हालांकि बालू कारोबारी ने
अपने पत्ते नहीं खोले हैं। न ही किसी दल से अध्यक्ष पद के लिए टिकट का
खुलकर आवेदन किया है। इसके बाद भी अन्य दावेदारों के दिलोदिमाग में यह खौफ
है कि वोट के लिए नोट चला तो बालू कारोबारी को कोई मात नहीं दे सकेगा।
यह
भी भनक लग रही है कि सपा हाईकमान से भी बालू कारोबारी की खुफिया बातचीत चल
रही है। सपा से टिकट मिल जाए तो कोई बड़ा अजूबा नहीं होगा। बालू कारोबारी
की पत्नी जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुई हैं।
जिला पंचायत
अध्यक्ष पद को लेकर सपा में चल रही कशमकश के बीच यह भी चर्चा है कि बांदा
में किसी गैर यादव बिरादरी के सदस्य को सपा अध्यक्ष पद का प्रत्याशी
बनाएगी।
इसके पीछे दलील दी जा रही है कि मंडल के तीनों अन्य जिलों
में यादव प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं। अब सिर्फ बांदा ही अन्य जाति के लिए
बचा है। ऐसे में ठाकुर या ब्राह्मण को प्रत्याशी बनाया जा सकता है।