जिला बाल संरक्षण समिति ने कहा कि पुलिस किशोर अभियुक्तों के मामले में
किशोर न्याय अधिनियम के तहत ही कार्रवाई करे। अधिनियम के तहत ही उनके साथ
व्यवहार भी हो। समिति ने ये निर्देश सोमवार को समिति अध्यक्ष जिला पंचायत
अध्यक्ष बल्देव वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिया।
जिला
पंचायत अध्यक्ष कक्ष में हुई बैठक में बताया गया कि बांदा जनपद में बच्चों
के लिए सरकारी या स्वैच्छिक संगठनों द्वारा कोई भी आश्रय गृह संचालित नहीं
है। समिति ने निर्णय लिया कि बालिका गृह संचालन के लिए महिला कल्याण विभाग
और शासन को पत्र भेजा जाएगा।
साथ ही शिशु गृह एवं आश्रय गृह संचालन
के लिए सक्षम सश्रम स्वैच्छिक संगठन का प्र्रस्ताव पंजीकरण के लिए शासन को
भेजा जाएगा। जिला प्रोबेशन अधिकारी/सिटी मजिस्ट्रेट केएस पांडेय ने बताया
कि डीएम की अध्यक्षता में जिला बाल संरक्षण इकाई का गठन हो चुका है।
इसमें
संविदा पदों को भरने के लिए एजेंसी का चयन भी हो गया है। जल्द ही कर्मचारी
उपलब्ध हाेंगे। प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि जिले में दत्तक ग्रहण के लिए
विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण इकाई उपलब्ध नहीं है।
बैठक में फैसला लिया
गया कि पुलिस बच्चों से संबंधित मामलों पर किशोर न्याय अधिनियम के तहत
कार्रवाई करे। सीओ सदर ने भरोसा दिलाया कि इसके लिए पुलिस अधिकारियों को
प्रशिक्षित किया जाएगा।
अध्यक्ष ने श्रम परिवर्तन अधिकारी को
निर्देश दिया कि बाल श्रम से जुड़े बच्चों को मुक्त कराने के लिए पुलिस का
सहयोग लेकर कार्रवाई करें।
उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी एससी सचान
ने बताया कि जनपद में महिला कल्याण विभाग द्वारा बालिका गृह की स्थापना
कराई जा सकती है। बाल संरक्षण अधिकारी राजीव प्रताप सिंह ने कहा कि
आईसीपीएस योजना के तहत ब्लाक और गांव स्तर पर बाल संरक्षण समितियों का गठन
किया जाएगा।
गांव के गरीब और उपेक्षित परिवारों के बच्चों को
स्पांसरशिप योजना से जोड़ा जाएगा। बाल कल्याण समिति के चंद्रमौलि
श्रीवास्तव ने किशोर न्याय अधिनियम और आईसीपीएस योजना के प्रावधानों की
जानकारी दी। शशि सिंह ने चाइल्ड लाइन 1098 के बारे में बताया।
अध्यक्ष
ने इसका प्रचार-प्रसार करने को कहा। बैठक में बीएसए, डीआईओएस, श्रम
परिवर्तन अधिकारी, डीपीआरओ सहित महेंद्र सिंह गौतम, राजीव प्रताप सिंह,
भावना श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।