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‘नातेदार घर न आवैं, कसत करब उनकी खातिर’

Sun, 29 Mar 2015 11:54 PM IST
मृत्युंज्य द्विवेदी/ अमर उजाला, बांदा
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हम इस वक्त अतर्रा के जबरापुर गांव में हैं। यहां भी फसलों को जबरदस्त नुकसान पहुंचा है। हमें अपनी ओर आता देख दरवाजे पर बैठा वृद्ध किसान राम नारायण यह समझ बैठा कि उसके घर कोई मेहमान आ गए हैं।
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चेहरे पर तनाव की लकीर साफ झलक आई। हमने अपना परिचय दिया तो उसने राहत भरी ठंडी सांस ली। बोला- ‘सगा संबंधी, नातेदार घर न आवैं। उनकी खातिर कसत करब? आपन परिवार तो रूखा-सूखा खइके काम चला लइबे।’

मेहमान नवाजी के लिए मशहूर रहे बुंदेलखंड के गांवों में अब यही हालात हैं। यहां दैवीय आपदाओं ने काफी कुछ बदल डाला है। ओला बारिश के मारे लोग नहीं चाहते कि उनके घर नातेदार या मेहमान आए। रामनारायण के पास सिर्फ पांच बीघा जमीन है। इनमें चना और अरहर बोया था। सब चौपट हो गया।
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बोला- ‘सबै कुछ भगवान लइगा, अगले साल खातिर बीजा कहां से अई? साल भर का खइबे।’ नजदीक में खड़ी उसकी नातिन अर्चना की ओर देखकर बोला- ‘सरकार से कुछ मिल जई तौ, यहके हाथ पीले करबे। अपन मरन से पहले यही इच्छा है।’ रामनारायण ने बताया कि लेखपाल आज तक यहां नहीं आया।

उधर, इसी गांव के मजरा कलवरिया पुरवा में घुसते ही घासपूस के खपरैल वाले मकान के बाहर बैठा वृद्ध किसान रामशरण यादव एक टक लगाकर ‘अमर उजाला’ टीम को देखता रहा। उसे परिचय बताया गया तो उसने हाथ से इशारा कर संकेत दिया कि उसे सुनाई नहीं पड़ता।

इसी बीच भैंस लेकर लौटे पुत्र रामविशाल ने बताया कि फसल की बर्बादी देखकर पिता रामशरण बार-बार रोते हैं। पांच बीघा जमीन में चना, अरहर, गेहूं, अलसी, सरसों बोया था। ओला, बारिश में सब खत्म हो गया।

राम विशाल के मुताबिक भतीजी केतकी की शादी का इरादा इस साल टाल दिया है। राम विशाल की पत्नी गेंदिया ने बताया कि बैंक का एक लाख 10 हजार रुपया कर्ज बाकी है।

फावड़ा चलाएंगे पर बेटे को पढ़ाएंगे
दो भाइयों के बीच सिर्फ पांच बीघा जमीन में अपना गुजर-बसर कर रहे किसान देवराज (जबरापुर) फसल बर्बाद होने के बाद इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी कर रहे उसके बेटे नरेंद्र कुमार की पढ़ाई पर कोई अड़चन न आए।

हालांकि देवराज का कहना है कि बेटे की पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्हेें मजदूरी भी करना पड़ी तो परहेज नहीं करेंगे। कहा कि अब खेती घाटे का सौदा बन गई है। ऐसे में अपने बेटे को सिर्फ किसानी पर निर्भर नहीं करना चाहते। उसे पढ़ा-लिखाकर कुछ और कराएंगे।

लेखपाल को नहीं मिली चेक बनाने की फुरसत
जबरापुर गांव में बर्बाद हुई फसल अपनी आंखों पर चढ़ी मोटी कांच के चश्मे से देखने के बाद हल्का लेखपाल किशनलाल का कहना है कि उनके पास बहुत काम हैं। इसलिए किसानों को मदद/मुआवजे के चेक अभी नहीं बना पाए हैं।

शनिवार को तहसील परिसर में अभिलेख खोले बैठे लेखपाल का इस संवाददाता से कहना था कि वह उन्हें पहचानता नहीं है इसलिए ज्यादा कुछ नहीं बताएगा। उधर, तहसीलदार राजेश कुमार मिश्र ने बताया कि दलहन व तिलहन फसलें 100 फीसदी खराब हुई हैं।

शासन किसानों को जो भी सहायता मंजूर करेगा व दी जाएंगे। लेखपालों से जल्द ही चेकों का वितरण कराया जाएगा।

मंदिर में सुबह-शाम ले रहे राम का नाम
दैवीय आपदा से निपटने के लिए देवी-देवताओं से ही आरजू-मिन्नत की जा रही है। कलवरिया पुरवा (जबरापुर) के युवकों ने अपने गांव को बदहाली से उबारने के लिए यही रास्ता अपनाया है। बुजुर्गों की सलाह पर युवाओं ने एक भजन मंडली गठित की है।

यह रोजाना सुबह-शाम पुरवा में स्थित सिद्ध हनुमान मंदिर में गाजे-बाजे के साथ एक घंटा राम धुन गा रही है। देवी-देवताओं से कामना की जा रही है कि गांव में खुशहाली लौटे। भजन मंडली टीम का नेतृत्व गांव का युवक चुन्नू कर रहा है। चुनूबाद पटेल, बसंतलाल, अरुण, वीरेंद्र, शंभू पटेल और संतू पटेल भी शामिल हैं।

क्षतिपूर्ति की ‘रेवड़ी’ से गांवों में बढ़ रहीं गांवदारी
‘अंधे की रेवड़ी’ तर्ज पर फसल क्षतिपूर्ति बांटकर बैंक और बीमा कंपनियां गांवों में गांवदारियां बढ़ा रही हैं। पूरे गांव में दैवीय आपदा से सारे किसानों को एक जैसी चपत लगने के बाद भी बैंक और बीमा वाले अपने कुछ खास चहेते या पसंदीदा किसानों को क्षतिपूर्ति दे रहे हैं। बाकी किसानों की अनदेखी कर रहे हैं।

इस रवैए पर नाराज किसानों ने न्यायालय में मुकदमा दायर करने की चेतावनी दी है। सदर तहसील के अरबई गांव के किसान प्रेम सिंह पांच हेक्टेयर के काश्तकार हैं। उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक से 10 लाख रुपये का केसीसी लिया है।

पिछले कई वर्षों से बैंक ने बिना सूचना दिए उसके खाते से क्रमश: 5250 और 5114 रुपये खरीफ प्रीमियम के नाम पर काट लिए, लेकिन क्षतिपूर्ति धेला नहीं दिया। किसान प्रेम सिंह ने बताया कि उन्हीं के गांव के कुछ काश्तकारों को क्षतिपूर्ति दी गई है।

किसान ने बीमा और बैंक प्रबंधकों को दिए पत्र में कहा है कि केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक बीमा कंपनियों के लिए ग्राम पंचायत इकाई है। यानि उस गांवों में सभी किसानों को बीमा राशि मिलनी चाहिए, लेकिन अरबई में ऐसा नहीं हो रहा। यह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन होने के साथ ही किसानों के साथ अन्याय भी है।

किसान ने चेतावनी दी है कि उन्हेें तत्काल क्षतिपूर्ति नहीं मिली तो वह सक्षम न्यायालय में मुकदमा दायर करेंगे। उधर, एक ही गांव में ‘अंधे की रेवड़ी’ की तर्ज पर क्षतिपूर्ति बांटे जाने से गांवों में किसानों के बीच पाले खिंच रहे हैं। यह रंजिश का रूप ले सकते हैं।
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