पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस वर्ष नए सत्र में जिले के दो परिषदीय स्कूलों को इंग्लिश मीडियम का तमगा फिलहाल मिलता नजर नहीं आ रहा। चयनित किए गए दो स्कूलों को इसलिए निरस्त करना पड़ा कि अभिभावकों को अपने बच्चों की शिक्षा इंग्लिश मीडियम पर मंजूर नहीं।
अब नए स्कूलों की तलाश की जा रही है। उधर, शासन ने अब तक इस योजना में कोई बजट नहीं दिया है। कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर परिषदीय स्कूलों में भी शिक्षा दिए जाने की मंशा से प्रदेश सरकार ने जनवरी में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जिले के दो परिषदीय स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम के लिए चयनित करने के निर्देश दिए थे।
बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले माह फरवरी में नगर क्षेत्र के छत्रसाल प्राथमिक विद्यालय और ग्रामीण क्षेत्र में शुकुल कुआं प्राथमिक विद्यालय को चयनित किया था। दोनों स्कूलों में अंग्रेजी में पारंगत पांच-पांच टीचरों का चयन कर उन्हें शिवरामपुर स्थित डायट में प्रशिक्षित किया गया है।
उधर, चयनित दोनों परिषदीय स्कूलों के बच्चों और उनके अभिभावकों ने अंग्रेजी माध्यम का विरोध किया। उनका कहना था कि उनके बच्चों को हिंदी माध्यम से पढ़ना है तो वे कहां जाएंगे ? इसके चलते बेसिक शिक्षा विभाग को इन दोनों स्कूलों को खारिज करना पड़ा।
अब ऐसे स्कूलों की तलाश की जा रही हैं, जहां एक ही परिसर अथवा आसपास दो परिषदीय प्राथमिक विद्यालय हों। इनमें एक में हिंदी माध्यम तो दूसरे में अंग्रेजी माध्यम पर स्कूल चलेगा। पहली अप्रैल से इस साल नया शिक्षा सत्र शुरू हो रहा है।
तीन दिन शेष बचे हैं। ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग नए स्कूलों का चयन कैसे कर पाएगा ? उधर, शासन ने चयनित स्कूलों के लिए अब तक कोई बजट आदि नहीं दिया है।
इस बारे में जिला बेसिक शिक्षाधिकारी, डॉ.सत्यनारायण का कहना है कि कुछ खामियों और अड़चनों के कारण चयनित किए गए स्कूलों को निरस्त कर दिया गया है। जल्द ही अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के चयन प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। टीचरों को प्रशिक्षित कर दिया गया है। फिलहाल शासन से इन स्कूलों के लिए अलग से कोई बजट नहीं आया।
महोखर और पचनेही से आए प्रस्ताव
इंग्लिश मीडियम स्कूलों के लिए महोखर और पचनेही गांवों के प्राथमिक विद्यालयों का चयन हो सकता है। नगर शिक्षा अधिकारी सुनील द्विवेदी ने बताया कि यहां से ग्रामीणों के प्रस्ताव आए हैं। इन पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दो-तीन दिनों में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का चयन कर लिया जाएगा।
शासन में अटकी ड्रेस की 25 फीसदी धनराशि
परिषदीय स्कूलों में यूनीफार्म की शेष 25 फीसदी धनराशि नहीं आई जबकि वित्तीय वर्ष खत्म होने वाला है। सितंबर में शासन ने करीब 1.96 लाख बच्चों के लिए 5.89 करोड़ रुपये ड्रेस का बजट दिया था। बाकी 1.96 करोड़ रुपये की दूसरी किश्त ड्रेस वितरण के बाद मिलनी थी।
प्रधानाध्यापकों ने उधारी या जुगाड़ से किसी तरह बच्चों को ड्रेस वितरित कर दी, लेकिन अब छह माह बीत गए और बाकी बजट नहीं मिला। माना जा रहा है कि इस वर्ष के बाकी रह गए तीन दिनों में यह पैसा नहीं आया तो वह फिर नहीं मिलेगा। ऐसे में टीचर खासे परेशान हैं। सामेकित शिक्षा जिला समन्वयक अरविंद कुमार अस्थाना ने बताया कि बजट आते ही चेक काट दिए जाएंगे।
केजीबीवी में भी अप्रैल से शुरू होगा शिक्षासत्र
बांदा। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों का शैक्षिक सत्र भी अप्रैल से शुरू होगा। पहली अप्रैल से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी। विद्यालयों में ड्राप आउट बालिकाओं के नामांकन के लिए मोटीवेशन कैंप लगाए जाएंगे। इस संबंध में परियोजना की ओर से विभाग को निर्देश जारी किए गए हैं।
सर्व शिक्षा अभियान की राज्य परियोजना निदेशक शीतल वर्मा ने बीएसए को भेजे पत्र में कहा है कि कस्तूरबा विद्यालयों में शिक्षा सत्र एक अप्रैल से शुरू होगा। पहली से 30 जून तक अवकाश रहेगा जबकि कर्मचारियों को सिर्फ 25 जून तक ही छुट्टी मिलेगी। विद्यालय में ड्राप आउट बालिकाओं का शत-प्रतिशत नामांकन करने के लिए गोष्ठी व मेले के आयोजन होंगे।
इसमें बालिकाओं को विद्यालय में रहने के तौर तरीके सिखाए जाएंगे। साथ ही अभिभावकों से संपर्क कर विद्यालय न जाने वाली बालिकाओं का पंजीकरण किया जाएगा। परियोजना निदेशक के निर्देश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. सत्यनारायण ने इस संबंध में सभी वार्डेन को आदेश जारी किए हैं। विद्यालयों में लक्ष्य के सापेक्ष बालिकाओं के प्रवेश दिलाने को कहा है।