बांदा। देवोत्थानी एकादशी परंपरागत तरीके से मनाई गई। शहर व गांव रंगीन विद्युत झालरों व दीपकों की चकाचौंध से जगमगा उठे।
महिलाओं ने देर शाम भगवान विष्णु का पूजन कर गन्ना व लाई-कमल गट्टा का प्रसाद चढ़ाया। देर रात तक उत्साहित बच्चों ने आतिशबाजी की।
देवोत्थानी
एकादशी को लेकर मान्यता है कि इस पर्व पर भगवान विष्णु की विधि-विधान से
पूजा करने से मोक्ष व स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
इसी दिन से
गन्ना की फसल भी तैयार मानी जाती है और इसकी पेराई का काम शुरू होता है।
ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में रविवार को देवोत्थानी एकादशी श्रद्धा के साथ
मनाया गया। गांवों में महिलाओं ने गन्ना पूजन किया तथा लोगों ने खेतों व
मंदिरों में दिए जलाए।
दीपक व विद्युत झालरों की रोशनी से घर मकान
जगमगा उठे। देर रात तक बच्चों ने आतिशबाजी का लुत्फ उठाया। जगह-जगह गन्ना
की दिन भर बिक्री हुई।
महेश्वरी देवी मंदिर में सोमवार को तुलसी
विवाह की रस्म अदा की जाएगी। मंदिर में तुलसी विवाह के लिए मंडप सजाया
जाएगा। परंपरागत ढंग से भगवान विष्णु की बारात निकलेगी और द्वारचार आदि
रस्मे होंगी।