चैत्र नवरात्र पर विंध्यवासिनी धाम में ‘पूत-कुपूत सुने है मैया, पर न सुनी कुमाता’ जैसे देवी भजन व गीत गूंज रहे हैं। विंध्यवासिनी देवी मंदिर में सप्तमी पर श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ गई। भक्तों ने पहाड़ पर विराजमान विंध्यवासिनी के दर्शन कर मन्नतें मांगी। सर्कस, रामलीला आदि का लुत्फ उठाया।
नवरात्र मेले में बृहस्पतिवार को देवी भक्तों ने भंडारा कराया। हलवा-पूड़ी, खीर-पूड़ी, पेठा का प्रसाद वितरित कराया। मेला कमेटी प्रबंधक प्रेम स्वरूप द्विवेदी की अगुवाई में कार्यकर्ता मेलार्थियों की सुरक्षा व देखरेख में लगे रहे। भक्तजन मेला स्थल पर चल रहे सर्कस, काला जादू और रात में रामलीला और जगराता का लुत्फ उठा रहे हैं।
मध्य प्रदेश के छतरपुर, पन्ना जिले समेत आसपास के गांवों से आने वाले हजारों महिला व पुरुष भक्त मां के दर्शन कर मुंडन संस्कार, कन्या भोज, दुर्गा शप्तसती पाठ आदि अनुष्ठान करा रहे हैं।
उधर, कई सालों से पर्यटक विभाग द्वारा बनाए गए रैन बसेरा में खाद भरी हुई है। इससे श्रद्धालुओं को रात्रि में ठहरने में दिक्कतें आ रही हैं। क्षेत्राधिकारी नरैनी ने बृहस्पतिवार को मेला में सुरक्षा का जायजा लिया। उन्हें सुरक्षा में लगाए गए कर्मचारी नदारद मिले। उन्होंने इस पर नाराजगी जताई।
बांदा में महेश्वरी देवी सहित काली देवी, चौसठ जोगिनी, मरही माता, सिंहवाहिनी, महामाई आदि मंदिरों में भी सप्तमी पर श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ गई। महेश्वरी देवी में कन्या भोज आयोजित हुआ। मंदिरों के घंटे तड़के से देर तक घनघनाते रहे।
उधर, संकट मोचन मंदिर में कथा व्यास सारंग महराज ने कहा कि नवरात्र में सप्तमी भगवती कालरात्रि का दिन है। इस दिन उनकी विधि विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मढ़ीदाई में हवन-पूजन और प्रसाद चढ़ाने की होड़ रही। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में खरीददारी भी खूब हुई। कई स्थानों पर कन्या भोज हुए। सतीश चौरसिया ने मढ़ीदाई में कन्या भोज कराया।