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तीन घंटे के लिए फरवरी में पैतृक गांव आए थे देवेंद्र

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कानपुर में शहीद सीओ देवेंद्र मिश्र के बांदा स्थित पैतृक गांव सहेवा में उनके घर पर सांत्वना देने प - फोटो : BANDA
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मृत्युंजय द्विवेदी (संवाद)
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अतर्रा (बांदा)। बांदा के लाल पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) देवेंद्र कुमार मिश्र के कानपुर में बदमाशों से मुठभेड़ में शहीद होने की खबर से उनके पैतृक गांव सहेवा में शोक की लहर छा गई। देवेंद्र चार महीने पहले चित्रकूट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में ड्यूटी करने के बाद कानपुर जाते वक्त कुछ घंटों के लिए गांव आए थे और परिजनों व गांव वालों से जल्द ही दोबारा आने का वादा भी कर गए थे, लेकिन दोबारा आने की जगह गांववालों को रुला कर हमेशा-हमेशा के लिए चले गए।
सहेवा गांव के महेश प्रसाद मिश्र के तीन बेटों में सबसे बड़े देवेंद्र मिश्र पुलिस में काफी पहले भर्ती हो गए थे। अब उनके रिटायरमेंट का समय था। अगले साल ही सेवानिवृत्त होना था। हालांकि उनका परिवार बांदा और कानपुर में ज्यादा रहता है। पैतृक गांव में उनके रिश्ते के चाचा चंद्रशेखर मिश्र हैं।
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खपरैलदार मकान के बाहर देवेंद्र मिश्र पुलिस उपाधीक्षक की नेम प्लेट लगी है। शहादत की खबर आते ही सुबह ही खुरहंड चौकी और स्थानीय पुलिस की टुकड़ी उनके घर पहुंच गई और सांत्वना जताई। इसी बीच गांव के बुजुर्गों का जमघट लग गया। गांव के देवशरण शुक्ला, महेश्वरी प्रसाद अवस्थी, दिलीप त्रिवेदी, विष्णु तिवारी ने बताया कि बेहद सादगी और मिलनसार स्वभाव के देवेंद्र 29 फरवरी को गांव आए थे।
वह चित्रकूट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में ड्यूटी पर गए थे। वहां से लौटते समय तीन घंटे के लिए फोर्स के साथ गांव आए थे। सबकी खैरियत ली थी। वादा किया था कि जल्द ही फिर आएंगे। रिटायरमेंट के बाद गांव को आबाद करने का इरादा जाहिर किया था। उन्होंने यहां घर के दरवाजे पर ही अपने माता-पिता की स्मृति में शंकरजी का मंदिर बनवाया था।
देवेंद्र मिश्र के छोटे भाई राजीव मिश्र, रामग्रीदीन मिश्र बांदा में रहते हैं। पत्नी आशा मिश्रा और दो बेटियां उनके साथ रहती हैं। बेटियां नीट की तैयारी कर रही हैं। ससुराल मौदहा तहसील के इचौली गांव में है। माता-पिता का निधन करीब 15 वर्षों पूर्व हो चुका है।
तीनों भाइयों के बीच करीब 70 बीघा खेती है। देवेंद्र ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मिडिल तक गांव में ही पूरी की। हाईस्कूल खुरहंड गांव के जनता इंटर कालेज और इंटर बांदा में आदर्श बजरंग इंटर कालेज से किया। स्नातक पंडित जेएन डिग्री कालेज से किया। पिता महेश प्रसाद गांव के ही जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक थे।
बहादुर बहुत थे, डीजी ने किया था पुरस्कृत
क्षेत्राधिकारी देवेंद्र मिश्र अपने कर्तव्यों के प्रति जागरुक और ईमानदार थे। वे बहादुर भी दे। शायद बहादुरी का यही जज्बा उनकी जान जाने का सबब बन गया। उनकी बहादुरी की बानगी थी कि वर्ष 2012 में चर्चित ट्रेन डकैती के बदमाशों को उन्होंने दबोच कर लूट का माल भी बरामद कर लिया गया था।
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तब वे इंस्पेक्टर थे। तत्कालीन पुलिस महानिदेशक अतुल ने उन्हें 15 हजार रुपये इनाम और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। बाद में पुलिस उपाधीक्षक पद पर पदोन्नत हुए। गिरवां थाना इंस्पेक्टर शशि कुमार पांडेय ने बताया कि अगले वर्ष देवेंद्र मिश्र सेवानिवृत्त होने वाले थे।

इलाहाबाद में ट्रेन डकैती का पर्दाफाश कर बदमाशों को गिरफ्तार करने पर तत्कालीन पुलिस महानिदेशक द्- फोटो : BANDA

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