बांदा। पिछले छह वर्षों में मनरेगा से कराए गए कार्यों में 1.23 करोड़ रुपये से ज्यादा की अनियमितताएं सोशल आडिट टीम ने पकड़ी हैं। ग्राम विकास विभाग इनको दबाए हुए था, लेकिन अब प्रदेश के अपर आयुक्त (मनरेगा) द्वारा आडिट रिपोर्टों का ब्योरा तलब कर लिए जाने पर यह मामला गर्मा गया है। कार्रवाई की जद में दो दर्जन ग्राम पंचायतों के प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक आएंगे।
वर्ष 2013-14 से मौजूदा वर्ष 2019-20 तक ग्राम पंचायतों में कराए गए मनरेगा कार्यों का टीमों द्वारा सोशल आडिट किया गया था। इसमें 1 करोड़ 23 लाख 78 हजार 179 रुपये की अनियमितताएं पाई गईं। यह घोटाले मिट्टी के कार्यों में हुए। मसलन पुरानी मेड़ पर नाम मात्र की मिट्टी डालकर उन्हें नया दर्शा दिया गया। कुछेक गांवों में बिना काम कराए भुगतान कर दिया गया। सोशल आडिट टीमों ने अपनी यह रिपोर्ट यहां ग्राम विकास विभाग को दी थीं। लेकिन इसकी फाइलें अलमारियों में ही कैद रहीं। कार्रवाई अमल में नहीं आई।
अब प्रदेश के अपर आयुक्त (मनरेगा) ने सोशल आडिट टीमों की रिपोर्ट तलब कर ली है। इसे 20 दिसंबर तक भेजने को कहा है। इससे ग्राम विकास विभाग में खलबली मची है। आडिट रिपोर्ट की फाइलों को तेजी से दुरुस्त किया जा रहा है। एक-दो दिन में मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से अपर आयुक्त को यह रिपोर्ट भेजी जानी है।
पकड़ी गई अनियमितताओं में महुआ ब्लाक में 19,43,324, नरैनी में 1,25,345, बबेरू में 89,19,805, जसपुरा में 1,49,646, बिसंडा में 4,44,349 और बड़ोखर खुर्द में 7,95,710 रुपये की अनियमिताएं शामिल हैं। उधर, इस बारे में जिला विकास अधिकारी कृष्ण करुणाकरण पांडेय का कहना है कि आडिट रिपोर्ट पर कार्रवाई के लिए परियोजना अधिकारी (मनरेगा) को लिखा गया था। दूसरी तरफ परियोजना अधिकारी आरपी मिश्रा का कहना है कि आरोपी प्रधान व सचिवों से रिकवरी कार्रवाई कराई जा रही है।