बांदा। नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में गुरुवार को प्रदेश व्यापी आंदोलन में सपा ने यहां भी धरना-प्रदर्शन किया। धारा 144 और पुलिस की तमाम पाबंदी और घेराबंदी के बावजूद कलक्ट्रेट के पास कई घंटे धरना-प्रदर्शन चला। इस दौरान पूरा इलाका पुलिस छावनी बना रहा। इसके पूर्व रात में पुलिस ने एडीएम द्वारा जारी नोटिस चुनिंदा सपा नेताओं के घरों में दस्तक देकर उन्हें थमाया। जिन नेताओं ने नोटिस नहीं लिया, उनके दरवाजों पर चस्पा कर दिया।
सपा के आंदोलन के मद्देनजर प्रदेश के गृह मंत्रालय ने बुधवार रात ही इसे रोकने की रणनीति बना ली थी। पुलिस को निर्देश जारी किए गए थे। रातोंरात सपा नेताओं को नोटिसें जारी हुए। कलक्ट्रेट और आसपास का इलाका सुबह से पुलिस छावनी में बदल दिया गया। इसके बावजूद कलक्ट्रेट के नजदीक सपाइयों ने तंबू तानकर कई घंटे धरना दिया और भाषणों में भाजपा की केंद्र व राज्य सरकारों की फजीहत की। मुख्य मुद्दा नागरिक संशोधन कानून और एनआरसी रहा। किसानों, मजदूरों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों के मुद्दे और कानून व्यवस्था को भी शामिल किया गया। धरने के बाद सपा नेताओं ने उसी स्थान पर मौजूद सिटी मजिस्ट्रेट को पांच पृष्ठीय ज्ञापन सौंपा। प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित इस ज्ञापन में 18 मांगें शामिल थीं।
धरना व सभा में राज्यसभा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद, पूर्व विधायक विशंभर सिंह यादव, नगर पालिका अध्यक्ष मोहन साहू, पूर्व जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी, बीपी यादव, हसनुद्दीन सिद्दीकी, कोआपरेटिव बैंक पूर्व अध्यक्ष लाखन सिंह, भरत दिवाकर, रामऔतार भाऊ, अधिवक्ता अशोक दीक्षित, मुशीर अहमद फारुकी, मनोज वर्मा, वृंदावन वैश्य, कुदरत उल्ला, आमिर खां मन्नी, प्रियांशू गुप्ता, विवेक बिंदु तिवारी, कल्लू चौहान, रामपाल अवस्थी, असलम खां, अमर सिंह यादव, मइयादीन यादव, जगदीश कुशवाहा, विदित त्रिपाठी, रानी देवी, आत्माराम यादव, सुशील त्रिवेदी, उमा सिंह, बलवान सिंह, मनोज निगम लाला, अशोक भागवानी, मदन गोपाल टंका, प्रदीप जड़िया, पीयूष गुप्ता, नीरज द्विवेदी, पतिराखन निषाद, महबूब अली, रईस अहमद, जावेद, शिवकरन यादव, गिरिवर गौतम आदि शामिल रहे।
सपा के प्रदर्शन में तैनात पुलिस बल।- फोटो : BANDA