बांदा। डेंगू को लेकर हाईकोर्ट के सख्त रुख पर भी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में कुछ खास असर नहीं आ रहा। हाईकोर्ट द्वारा प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग और शहरी विकास प्रमुख सचिवों को इस मामले में तलब कर लिया गया है। फिर भी जिला अस्पताल में लापरवाहियां बरकरार हैं। डेंगू वार्ड में न तो वार्ड ब्वाय है, न ही दवाएं। परेशान होकर उत्तेजित मरीज और तीमारदारों ने देर रात अस्पताल में हंगामा मचाया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में चल रहे डेंगू के प्रकोप पर कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य और शहरी विभागों के प्रमुख सचिवों को तलब किया है। उनसे पूछा है कि इस बारे में हाईकोर्ट द्वारा 19 सितंबर को दिए गए आदेशों पर क्या अमल हुआ? हाईकोर्ट 4 अक्तूबर को फिर इसकी सुनवाई करेगा लेकिन हाईकोर्ट के आदेशों पर कितना अमल हो रहा है इसकी बानगी के लिए मंडल मुख्यालय बांदा का बांदा अस्पताल काफी है। यहां अस्पताल प्रशासन ने डेंगू मरीजों के लिए 8-8 बेड के दो वार्ड बना दिए हैं। लेकिन यह सिर्फ दिखावटी कार्रवाई साबित हो रहे हैं। डेंगू वार्ड में मरीज तो भर्ती हैं, लेकिन वार्ड ब्वाय नहीं है। इस वार्ड में तैनात स्टाफ नर्स प्रीति चक्रवर्ती और वंदना जोशी द्वारा सीएमएस को दिए गए पत्र से डेंगू वार्ड की व्यवस्था की पोल खुल गई है। नर्सों का कहना है कि डेंगू वार्ड के लिए उन्हें वार्ड ब्वाय नहीं दिए गए हैं। जबकि वे कई बार मौखिक रूप से अवगत करा चुकी हैं। न ही वार्ड में दवाएं दी जा रही हैं।
इन्हीं अव्यवस्थाओं पर मंगलवार को देर रात डेंगू वार्ड में मरीजों व तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा। ट्रामा सेंटर जाकर वहां बैठे डाक्टर से नोंकझोंक की। उनका रजिस्टर फेंक दिया। डेंगू वार्ड में मरीज देखने को कहा। इसी के बाद डाक्टर डेंगू वार्ड आए और मरीज देखे। साथ ही ट्रामा सेंटर से दवाएं भी भेजी गई। तीमारदार पवन कुमार (भरखरी), कृष्णपाल (गोखरही), राजू यादव (मऊ, नरैनी) आदि ने बताया कि मरीज की जान बचाने के लिए उन्हें बाजार से आनन-फानन इंजेक्शन और दवाएं खरीदना पड़ीं। उधर, डेंगू के लिए नए भवन में बनाए गए वार्ड के मरीजों को बिना मच्छरदानी रखा जा रहा है। इन पर मच्छरों के डंक का रात-दिन खतरा मंडरा रहा है।