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बारिश से बढ़ी यूरिया की डिमांड, मंडल में नहीं स्टॉक

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खेतों में लहलहाती गेहूं फसल। - फोटो : BANDA
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बांदा। इस बार रबी सीजन में हुई अच्छी बारिश ने चित्रकूटधाम मंडल में यूरिया की खपत बढ़ा दी है। आलम यह है कि निर्धारित लक्ष्य से चार हजार मीट्रिक टन ज्यादा यूरिया खाद की उठान के बाद भी किसानों की मांग पूरी नहीं हो पाई। बड़ी संख्या में किसान रबी के लिए यूरिया खाद के लिए जद्दोजेहद कर रहे हैं।
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चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों के बफर गोदामों में यूरिया खाद का स्टॉक लगभग खत्म चुका है। पीसीएफ ने रबी के लिए मंडल में 44,020 मीट्रिक टन (एमटी) का लक्ष्य निर्धारित किया था। अब तक 47,847 एमटी यूरिया बंट चुकी है। इसके बाद भी किसानों की जरूरत पूरी नहीं हो पाई। पीसीएफ ने 2700 एमटी और यूरिया खाद की मांग भेजी है।
इस बार हुई अच्छी बारिश की वजह से पिछले वर्षों से ज्यादा खाद की खपत हो रही है। हालांकि पीसीएफ ने पिछले वर्ष के लक्ष्य को ही इस वर्ष भी निर्धारित कर दिया था, लेकिन उसका यह अनुमान गलत साबित हुआ। रबी का बुआई क्षेत्र बढ़ने और बारिश ने इस वर्ष अब तक 47 हजार 847 मीट्रिक टन खाद की खपत कर दी है। यह निर्धारित लक्ष्य से 3827 एमटी अधिक है।
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यूरिया की खपत हमीरपुर और महोबा जिलों में ज्यादा हुई। यहां क्रमश: 15,244 व 13,060 एमटी खाद बांटी जा चुकी है। महोबा में लक्ष्य से दोगुना से ज्यादा खाद की खपत हुई। बांदा में 11,828 और चित्रकूट में 7715 एमटी खाद की खपत हुई।
चारों जिलों में अभी और यूरिया खाद की मांग चल रही है। यूरिया की बढ़ती मांग के मद्देनजर पीसीएफ ने 2700 एमटी यूरिया की डिमांड और भेजी है। यह भी जल्द ही यहां आएगी। जिला कृषि अधिकारी डा. प्रमोद कुमार ने बताया कि रबी सीजन में यूरिया की मांग काफी बढ़ जाती है। यह फसल का उत्पादन बढ़ाने में सहायक सिद्ध होती है।
चारों जिलों के बफर गोदाम में यूरिया स्टॉक खत्म हो चुका है। इफ्को से करीब 2500 से 2700 मीट्रिक टन की और मांग की गई है। शीघ्र ही इसकी रैक आने की उम्मीद है। मंडल के सभी गोदाम खाली हैं। उधर, पीसीएफ जिला प्रबंधक नितिन कुमार ने बताया कि एक-दो दिन में रैक आने पर वितरण शुरू हो जाएगा।-देवेंद्र कुशवाहा, क्षेत्रीय प्रबंधक, पीसीएफ।
चारों जिलों में यूरिया खाद की उपलब्धता और खपत (मीट्रिक टन में)
जिला लक्ष्य उपलब्ध खपत
बांदा 13,270 12,673 11,828
चित्रकूट 9217 8546 7715
हमीरपुर 15,322 15,557 15,244
महोबा 6211 13,263 13,060
योग 44,020 50,039 47,847
रकबा बढ़ा, बारिश अच्छी, खाद की खपत बढ़ी
बांदा। यूरिया की खपत बढने के पीछे किसान और कृषि विशेषज्ञ कई वजह बता रहे हैं। पहला यह कि लगभग 20 हजार हेक्टेयर बुवाई का रकबा बढ़ा है। दूसरा यह कि इस सीजन में पर्याप्त बारिश हो जाने से असिंचित क्षेत्रों में भी किसानों को अच्छी पैदावार होने की आस जागी है।
उत्पादन बढ़ाने के लिए यूरिया का इस्तेमाल भी बढ़ाया है। उधर, कृषि अधिकारी भी इन तथ्यों को दुरुस्त बता रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लगातार खाद के इस्तेमाल से भूमि इसकी आदी बन गई है। ऐसे में हर साल खाद की मात्रा बढ़ना स्वाभाविक है।
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