बांदा। मौत का झपट्टा इतना तेज आया कि यात्रियों को समझने या बचने की मोहलत या नौबत ही नहीं मिली। अधिकांश यात्री बांदा डिपो से सवार हुए थे। महज 18 किलोमीटर दूर तय की थी कि हाईवे पर सैमरी नाले का मोड़ मौत का अड्डा बन गया। सामने से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने बस के चिथडे़ उड़ा दिए।
यात्री जिस हालत में थे उसी स्थिति में जान गवा बैठे। चित्रकूट का सूरजपाल सिंह किसी से फोन पर बात कर रहा था। हाथ में मोबाइल थामे ही रह गया। कुछ देर बाद उसके फोन पर उसके बहू की काल आई। घंटी की आवाज सुनकर शवों के पास बचाव में जुटे बेंदा के पूर्व प्रधान विवेक कुमार सिंह ने फोन लेकर बात की और हादसे के बारे में बहू को बताया।
डीएम भड़के, तब इलाज में तेजी आई
बांदा। बस दुघर्टना में घायलों को जिला अस्पताल में बेड तो दे दिए गए, लेकिन इलाज में लेटलतीफी हुई। इसी बीच डीएम हीरालाल अस्पताल आ गए। उन्हाेंने तड़पते और कराहते मरीजों को देखा तो डाक्टरों पर भड़क गए। इसके बाद घायलों के इलाज में तेजी आई।
डीएम के निर्देश पर अस्पताल के सभी डाक्टरों के अलावा मेडिकल कालेज की टीम भी बुलाई गई। इन सभी ने घायलों का इलाज किया। जिला अस्पताल के ईएमओ डा. विनीत सचान, डा. बलबीर, डा. प्रदीप कुमार, डा. टीआर सरसैया , डा.मुकेश कुमार, डा. एसपी गुप्ता इलाज में जुटे रहे। डीएम के निर्देश पर मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य डा. मुकेश यादव दर्जन भर डाक्टरों के साथ जिला अस्पताल पहुंच गए और मरीजों का इलाज किया।
नेताओं और अफसरों का लगा जमावड़ा
बांदा। हादसे की खबर इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया के जरिये मिलते ही जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में विभिन्न दलों के नेताओं ने भी दस्तक दी। उधर, हर घायल से डीएम को हालचाल लेते देते अन्य अधिकारी भी सक्रिय रहे।
डीएम ने निर्देश दिया कि हर घायल के पास एक नर्स लगातार मौजूद रहे। एडीएम संतोष बहादुर, अपर एसपी, एलबीके पाल, सीओ सिटी आलोक मिश्रा पुलिस बल के साथ घायलों को बेड तक पहुंचाने में लगे रहे। उधर, पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्रा, भाजपा जिलाध्यक्ष लवलेश सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष व बसपा नेता बलदेव वर्मा, व्यापार मंडल के अमित सेठ भोलू, सपा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी, वृंदावन वैश्य, कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित भी अस्पताल पहुंचे। उधर, रोडवेज एआरएम परमानंद स्टेशन इंचार्ज मुबीन अहमद, रज्जन शुक्ल भी जिला अस्पताल पहुंचे।
अपनों की तलाश में भटकते रहे लोग
बांदा। बस दुघर्टना में मरने वालों के शवों को पुलिस ने क्षत-विक्षत हालत में सीधे मर्च्युरी हाउस में रखवा दिया। उधर, परिजन अपनों की तलाश में भटकते रहे। उधर, प्रशासन और पुलिस मरने वालों की सही संख्या बताने को भी लेकर देर असमंजस में रहे। घंटों बाद मर्च्युरी हाउस में शिनाख्त का सिलसिला शुरू हुआ। कुछ शव तो इतने ज्यादा क्षत-विक्षत थे कि उन्हें पहचाना मुश्किल था। कपड़ों से पहचान हुई। फतेहुपर निवासी राजू सविता अपनी पत्नी सोनी देवी को नहीं पहचान पाये। बमुश्किल कपड़ाें से शिनाख्त की।
दुर्घटना बाहुल्य मोड़ पर नहीं लगा कोई बोर्ड
बांदा। टाडा हाईवे पर सैमरी गांव के नजदीक उसरा नाले के आगे सड़क में घुमावदार मोड़ जानलेवा दुर्घटनाओं का अड्डा बन चुका है। यहां अक्सर दुर्घटनाएं होती है। कुछ दिनों पूर्व इसी मोड़ पर ट्रक की टक्कर से बाइक सवार युवक की मौत हो गई थी। जीप और ट्रक की टक्कर में जीप सवार यात्री की मौत हो गई थी। हैरत की बात यह है कि इस खतरनाक मोड़ पर पीडब्ल्यूडी ने कोई चेतावनी या सतर्कता संबंधी बोर्ड नहीं लगाया है।