बांदा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना शुरू नहीं हो
सकी। अंतिम तिथि 30 सितंबर बीत गई, पर अभी तक फीडिंग का कार्य पूरा नहीं हो
सका। मैन पावर की कमी इस योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कारगर बनाने
में आड़े आ गई है।
पूर्ति निरीक्षकों के सात पदों में सिर्फ एक की
तैनाती है। 11 लिपिकों का काम चार लिपिक संभाल रहे हैं। आपूर्ति विभाग में
प्राइवेट कर्मचारी राशन कार्ड बनाने से लेकर सूचनाएं तैयार करने तक का
कार्य कर रहे हैं।
तत्कालीन मंडलायुक्त कल्पना अवस्थी ने 30 सितंबर
तक हर हाल में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना की तैयारी पूरी करने को कहा
था, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ।
खाद्य सुरक्षा योजना के लिए आनलाइन
आवेदन करने वालों का पूरा डाटा भी अभी तक फीड नहीं हो पाया। आपूर्ति विभाग
कंप्यूटरों से तो लैस कर दिया गया है, पर अफसरों और कर्मियों की कमी पूरी
नहीं हो पा रही है। कर्मियों व अधिकारियों की ड्यूटी पंचायत चुनाव में लग
जाने से योजना अटकी है।
क्षेत्रीय अधिकारी गौरव चौधरी को जिला
पूर्ति अधिकारी का भी अतिरिक्त चार्ज दे रखा गया है। पूर्ति निरीक्षकों के
सात पदों में सिर्फ एक की तैनाती है। प्रधान लिपिक सहायक लेखाकार, ज्येष्ठ
लेखा लिपिक, आशुलिपिक के पद सालों से खाली हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा
योजना में फीडिंग के लिए सात प्राइवेट कर्मी लगाए गए हैं।
अभी
चुनावी व्यस्तता है। कर्मचारियों की कमी है। फिर भी बेहतर करने का प्रयास
किया जा रहा है। नए राशन कार्डों की फीडिंग, सूचनाएं बनाकर शासन व
उच्चाधिकारियों को भेजना, राशनकार्ड धारकों और कोटेदारों की समस्याएं दूर
करना है यह सब दो कर्मियों के जिम्मे है। चुनाव खत्म होते ही योजना शुरू हो
जाएगी।
-गौरव चौधरी, प्रभारी जिला पूर्ति अधिकारी, बांदा।