अवैध संतान मानकर बेटी का गला घोंट देने वाले पिता को अदालत ने ताउम्र कैद की सजा सुनाई है। बीस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। 20 माह पुराने इस मामले में हत्यारे पिता ने अपनी ससुराल में ही 12 साल की मासूम को मौत के घाट उतार दिया था।
मटौंध थाना क्षेत्र के मरौली गांव निवासी चुन्नू प्रसाद निषाद ने 13 सितंबर 2013 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने अपनी पुत्री उत्तरा की शादी 13 वर्ष पहले अतर्रा थाना क्षेत्र के रेहुटा गांव निवासी राममिलन निषाद के साथ की थी। उत्तरा और राममिलन के दो पुत्रियां हुईं।
राममिलन को शक हुआ कि पहली पुत्री खुशबू उसकी संतान नहीं है। इसे लेकर वह पत्नी उत्तरा के चरित्र पर शक करता रहा। आए दिन उसके साथ मारपीट करता था। इससे तंग आकर उत्तरा अपनी दोनों पुत्रियों को लेकर मायके आकर रहने लगी।
10 सितंबर 2013 को राममिलन ससुराल आया और पत्नी व पुत्रियों को ले जाने की बात कही। इस पर उत्तरा और उसकी बच्चियों को भेजने से इंकार कर दिया। राममिलन वहीं रुका रहा। रिपोर्ट के मुताबिक 12 सितंबर की रात सभी लोग घर की छत पर सो रहे थे।
तभी राममिलन पुत्री खुशबू (12) को छत से उठा ले गया और नीचे लाकर कमरे में रस्सी से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। बेटी को मौत के घाट उतारने के बाद वह फरार हो गया। पुलिस ने मौके से हत्या में इस्तेमाल की गई रस्सी और राममिलन का मोबाइल फोन बरामद किया था।
पुलिस ने विवेचना के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। 25 अक्तूबर 2013 को मामला सीजेएम की अदालत से सेशन अदालत भेज दिया गया। वहां सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता चंद्रभूषण यादव और सहायक शासकीय अधिवक्ता कैलाश चौबे ने पांच गवाह पेश किए।
शुक्रवार को जनपद न्यायाधीश चिंतामणि तिवारी ने मुकदमे का फैसला सुनाया। जिला जज ने आरोपी राममिलन निषाद को कत्ल के जुर्म में आजीवन कारावास और 20,000 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर तीन वर्ष की अतिरिक्त कैद होगी। अभियुक्त को जेल भेज दिया गया है।