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बांधों में पानी जुटाने को खड़े कर दिए गए फाटक

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बांदा। मानसूनी मौसम खत्म हो गया और चित्रकूटधाम मंडल के बांध पूरी तरह नहीं भर पाए। ऐसे में सिंचाई विभाग अब बांधों का पानी बचाने और जुटाने में जुट गया है। बांधों के गेट खड़े किए जा रहे हैं। बरियारपुर बांध के सभी फाटक खड़े कर दिए गए हैं। चित्रकूटधाम मंडल के 13 बांधों में से मात्र एक बांध ही पूरी क्षमता से भर सका है।
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मानसूनी मौसम शुरू होने से पहले जून माह में सिंचाई विभाग बांधों की क्रस्टवाल पर लगे गेट गिरा देता है, ताकि बारिश की बाढ़ से उफनाए बांधों का पानी केन नदी में गिरता रहे। 15 अक्तूबर को बारिश के मौसम की औपचारिक समाप्ति के बाद यह फाटक फिर खड़े कर दिए जाते हैं ताकि बांधों में पानी रोककर भंडार किया जा सके। यह पानी नहरों के जरिये पूरे साल सिंचाई को दिया जाता है। इस वर्ष भले ही बारिश का आंकड़ा भरपूर रहा, लेकिन बांधों के जल संग्रह क्षेत्रों में बारिश की कमी रही। बांध अपनी पूरी क्षमता से नहीं भर सके। मंडल में एक मात्र रनगवां (छतरपुर) इकलौता बांध है जो 100 प्रतिशत भर गया है। चित्रकूटधाम मंडल के बांदा जनपद को केन नहर से पानी देने वाला बरियारपुर बांध/वियर मात्र 74 फीसदी ही भर पाया है। सिंचाई विभाग ने इस बांध में पानी रोकने के लिए दो दिन पूर्व बांध के सभी 163 फाटक खड़े कर दिए हैं। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता धीरेंद्र प्रताप सिंह और सहायक अभियंता कमल के निर्देशन में 15 अक्तूबर से शुरू हुआ गेट खड़े करने का काम 18 अक्तूबर को खत्म हुआ। बरियारपुर बांध का मौजूदा जल स्तर 146.45 मीटर है। इसमें मात्र 9.36 मीटर पानी ही उपयोग में लाया जा सकता है।
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