बांधों में पानी खत्म हो जाने से पेयजल संकट गंभीर
होने के आसार हैं। बांदा शहर समेत दर्जनों गांवों की प्यास बुझाने वाली केन
का जलस्तर तेजी से घट रहा है।
बेमौसम बारिश न हुई तो गर्मी में
पेयजल को हाहाकार मचेगा। फिलहाल जल संस्थान ने केन नदी की बची-खुची धारा को
इंटेकवेल की ओर मोड़ लिया है। इसी से जलापूर्ति की जा रही है।
केन
नदी जनपद की लाइफ लाइन है। जल संस्थान ने नदी के दोनों तरफ हरदौली घाट और
भूरागढ़ घाट में इंटेकवेल बना रखे हैं। पंपों से केन नदी का कच्चा पानी
लेकर बांबेश्वर पहाड़ स्थित प्लांट में फिल्टर कर शहर को आपूर्ति किया जाता
है।
केन नदी को गंगऊ और बरियारपुर बांधों से पानी मिलता है। इस
बार बारिश कम होने से बांधों में पानी का पर्याप्त भंडार नहीं हो पाया।
अक्तूबर में ही बांधों का जल स्तर नीचे चला गया। बरियारपुर से पानी
डिस्चार्ज बंद हो जाने से केन नदी की हालत पतली हो गई।
बेमौसम की
बारिश भी नहीं हो रही, जिससे बांधों में कुछ पानी भर सके और केन की हालत
में सुधार आए। बांध से डिस्चार्ज पूरी तरह बंद होने से केन नदी दिसंबर में
ही मई और जून जैसे हालत पर आ गई है। इसमें बेहद पतली जलधारा बची है।
जल
संस्थान अभियंताओं ने भूरागढ़ और हरदौली घाट इंटेकवेल की जड़ों तक पानी
पहुंचाने को जेसीबी से खुदाई कर केन की बची-खुची जलधारा इंटेकवेल की ओर
मोड़ दी है।
जलधारा का रुख बदलने को बालू भरी बोरियां रखी गई हैं।
अधिशासी अभियंता वीवी सिंह ने बताया कि केन नदी में पानी का जलस्तर तेजी से
घटने से पेयजल आपूर्ति के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
15
दिन में तकरीबन 20 फिट नदी का जल स्तर घटा है। घटने का सिलसिला जारी है।
बारिश न हुई तो अप्रैल के बाद हालात गंभीर हो सकते हैं। भूगर्भ जल स्तर में
भी कमी आने से ट्यूबवेलों का भी डिस्चार्ज घटता जा रहा है।