शासन-प्रशासन से कोई मदद न मिलने से गोशाला की करीब 50 गायें चार दिन से भूखी हैं। गोशाला संचालक ने उनके पालन में 50 बीघा अपनी जमीन भी गिरवी रख दी। उसका भी परिवार मोहताज हो गया है। एसडीएम के आदेश के बावजूद तहसीलदार गोशाला की स्थिति देखने नहीं आए। उधर, अन्ना गायों को लेकर यूपी और एमपी के किसानों में टकराव व संघर्ष की नौबत आ गई है।
मध्य प्रदेश की सीमा से सटी नहरी ग्राम पंचायत में आर्यव्रत सांस्कृतिक संरक्षण गोशाला चल रही है। यह शासन से संरक्षित है। संचालक ब्रजेश कुमार का कहना है कि यहां करीब 50 गायें हैं। सरकारी सहायता न मिलने से अब ये भूखों मर रही हैं। बताया कि उसके पास 50 बीघे जमीन थी, उसे गहन रखकर गायों की व्यवस्था करता रहा, लेकिन अब उसका परिवार भी भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है।
एसडीएम नरैनी को चार दिन पहले प्रार्थना पत्र दिया था। उन्होंने तहसीलदार राजेश कुमार मिश्रा को मौके पर जाकर जांच करने के आदेश दिए, लेकिन अभी तक कोई जांच करने नहीं पहुंचा है। 50 से ज्यादा गाय-बछड़े बृहस्पति कुंड पहाड़ी (मध्य प्रदेश) में छोड़ दिए हैं। बिना चारा-दाना के चार दिन से गाय भूखी हैं। पानी पिलाकर काम चला रहे हैं।
उधर, किसानों द्वारा फसलों की सुरक्षा के लिए लगाए आरीदार तार अन्ना गायों के लिए आफत बन गए हैं। इन तारों से गाय घायल हो रही हैं। कई गायों के घाव गहरे हो गए हैं। यहां एमपी-यूपी सरहद में बसे नहरी, करतल, पुकारी आदि गांवों के किसान करीब एक हजार गाय लेकर महाराजपुर (एमपी) हांक आए। एमपी वालों ने उन्हें फिर इधर ही हांक दिया है। इसे लेकर यूपी और एमपी के किसानों में टकराव हो रहा है।