बांदा। विभिन्न कस्बों में पिछले कुछ समय से रसोई गैस सिलिंडरों की भारी किल्लत बनी हुई है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। घरेलू और व्यावसायिक दोनों तरह के सिलिंडरों की अनुपलब्धता ने न केवल घरों की रसोई को प्रभावित किया है, बल्कि खान-पान के छोटे व्यवसायों को भी बंदी के कगार पर पहुंचा दिया है।
अतर्रा, तिंदवारी, बबेरू, नरैनी, बदौसा, कमासिन, पैलानी, कालिंजर, चिल्ला और गिरवां जैसे कस्बों में इस संकट का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वहीं व्यावसायिक सिलिंडरों के दाम बढ़ा दिए गए हैं। जिले में कुल दो हजार व्यावसायिक सिलिंडर के कनेक्शन हैं। यह कनेक्शन उन लोगों को दिए जाते हैं जो होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा आदि से जुड़े प्रतिष्ठान हैं।
होटल, ढाबे और छोटे खान-पान व्यवसायियों को अब गैस चूल्हों के साथ-साथ कोयला और लकड़ी की भट्ठियों का भी सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनके परिचालन खर्चों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इस अतिरिक्त बोझ का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है, जहां चाय-नाश्ते से लेकर भोजन की थाली तक के दामों में 10 से 20 रुपये तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है।
उपभोक्ता परेशान, ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें
स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर गैस न मिलने से घरों के रोजाना के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं और रोजमर्रा का खर्च लगातार बढ़ रहा है। सिलिंडर की कमी और वितरण में आ रही बाधाओं के चलते लोग दिनभर इंतजार करने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। कई जगहों से गैस एजेंसियों की मिलीभगत से सिलिंडरों की कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
दुकानदारों की पीड़ा
रेस्टोरेंट संचालक अजय प्रताप का कहना है कि कई दिनों से रेस्टोरेंट बंद रखना पड़ रहा है। एजेंसी जाते हैं तो हर बार एक ही जवाब मिलता है कि सिलिंडर खत्म हैं। रेस्टोरेंट संचालक वैभव ने कहा कि व्यावसायिक गैस जैसी जरूरी सेवा में इस तरह की अव्यवस्था सीधे तौर पर प्रशासन और सप्लाई सिस्टम की नाकामी को उजागर करती है।
वर्जन
जिला पूर्ति अधिकारी क्यामुद्दीन ने बताया कि इन दिनों व्यावसायिक सिलिंडर नहीं आ रहे हैं जिससे हालात जरूर बिगड़े हैं। इसके चलते पत्राचार किया गया है, उम्मीद है कि जल्द ही व्यावसायिक सिलिंडरों की उपलब्धता हो जाएगी।