बांदा। अरब सागर से उठे ताउते तूफान ने मई में मानसूनी मौसम जुलाई माह का अहसास करा दिया। 24 घंटे से रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश से जगह-जगह जलभराव हो गया। लगभग 26 मिलीमीटर बारिश हुई। उधर, मौसम में बदलाव से अधिकतम तापमान में 8 डिग्री सेल्सियस गिरावट दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान भी चार डिग्री सेल्सियस लुढ़क गया।
मंगलवार से मौसम में आया बदलाव बुधवार को भी जारी रहा। रात से रुक-रुककर हो रही बारिश ने जिले को पानी से तरबतर कर दिया। शहर से लेकर गांवों तक जलभराव हो गया। लगभग 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली ठंडी हवाओं से गर्मी काफूर हो गई। तेज धूप की तपन भी नदारद रही।
हालांकि बिन बिजली उमस से लोग बेचैन रहे। मई माह में 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के इर्दगिर्द मंडराने वाले अधिकतम पारा बुधवार को लुढ़क कर 35 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। न्यूनतम तापमान भी 29 डिग्री से 25 डिग्री सेल्सियस हो गया।
मौसम जानकारों के मुताबिक चक्रवात के चलते अगले दो-तीन दिन ऐसा ही मौसम रहने के आसार हैं। उधर, कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डा.दिनेश शाहा का कहना है कि चक्रवाती बारिश खेतों के लिए बेहद मुफीद है। किसान खरीफ फसल की तैयारी कर सकते हैं। खेत में नमी आ जाने से जुताई आसान होगी। ज्वार की फसल के लिए बारिश अच्छी साबित होगी।
हल्की बारिश में चरमरा गई बिजली आपूर्ति
बांदा। मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी मामूली आंधी-बारिश में बिजली आपूर्ति चरमरा गई। पेड़ की डाल गिरने, तार टूटने, जंपर फुंकने आदि फाल्टों से मंगलवार को पूरी रात शहर के अधिकांश इलाकों की बिजली गुल रही। बलखंडी नाका, कटरा, छोटी बाजार, महेश्वरी देवी, चौक बाजार, अलीगंज, छावनी समेत मेडिकल कालेज व जिला अस्पताल की बिजली गुल रही।
लगभग 50 हजार की आबादी बिन बिजली उमस से बिलबिलाती रही। मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल में बिजली न होने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बुधवार को भी दिनभर बिजली की आवाजाही रही। अवर अभियंता श्रीकांत नामदेव ने बताया कि फाल्टों को दुरुस्त कर लिया गया है। उधर, जल संस्थान अभियंताओं ने बताया कि कनवारा पेयजल फीडर की आपूर्ति गुल होने से डीएम कालोनी, जवाहर नगर, सिविल लाइन जोन में गुरुवार को जलापूर्ति बाधित रहेगी।