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टिकट बगैर नहीं टिके मौजूदा और पूर्व सांसद

Sat, 23 Mar 2019 11:49 PM IST
ASIF ASIF अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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बाल कुमार, रज्जू बुधौलिया, श्यामाचरण, रामसेवक व नसीमुद्दीन सिद्दीकी। - फोटो : अमर उजाला
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चुनावी बरसात में नेताओं की उछलकूद शुरू हो चुकी है। बुंदेलखंड में लगभग हर दल में टिकट बगैर न टिक पाने वाले नेता मौजूद हैं। चित्रकूटधाम मंडल में 20 दिन में चार दिग्गज पाला बदलकर दलबदलुओं की फेहरिस्त में शामिल हो चुके हैं। इनमें एक मौजूदा और दो पूर्व सांसद हैं। 

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हर चुनाव में पाला बदलने के बयार बहती है। टिकट के लिए सारी मर्यादाएं और मान्यताएं तार-तार हो जाती हैं। मौजूदा लोकसभा चुनाव में भी यही हो रहा है। टिकट बगैर टिक न पाने वाले नेताओं की निष्ठाएं रातोंरात बदल रही हैं। शुरुआत 11 मार्च को बसपा नेता और पूर्व राज्यमंत्री (दर्जा प्राप्त) रामसेवक शुक्ला से हुई। उन्होंने टिकट की आस में बसपा छोड़ दी और कांग्रेस का परचम थाम लिया।

हालांकि उन्हें अब तक कांग्रेस ने फिलहाल कहीं से प्रत्याशी नहीं बनाया है। दल बदल का दूसरा कारनामा भाजपा के प्रयागराज से मौजूदा सांसद श्यामाचरण गुप्त ने अंजाम दिया। उन्हें भाजपा से टिकट दोबारा मिलने की आस नजर नहीं आई तो 16 मार्च को लखनऊ में सपा मुखिया अखिलेश यादव की पनाह में पहुंचकर सपा की सदस्यता हासिल कर ली। अखिलेश ने लगे हाथ उन्हें बांदा से प्रत्याशी घोषित कर दिया।
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दल बदल की बह रही इस बयार में शुक्रवार की रात एक और कड़ी जुड़ गई। सपा से टिकट न मिलने से खफा पूर्व सांसद बाल कुमार ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, महामंत्री प्रियंका वाड्रा, ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर की मौजूदगी में कांग्रेस का हाथ थाम लिया। कुछ घंटे बाद ही हाईकमान ने उन्हें बांदा-चित्रकूट सीट से कांग्रेस का प्रत्याशी घोषित कर बाकायदा सूची जारी कर दी। 

शुक्रवार को ही दिन में सपा के हमीरपुर से पूर्व सांसद रहे राजनारायण बुधौलिया उर्फ रज्जू महाराज ने लखनऊ में भाजपा कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय के समक्ष उपस्थित होकर भाजपा का दामन थाम लिया। उनके साथ राठ नगर पालिका अध्यक्ष श्रीनिवासी उर्फ बबलू बुधौलिया भी भाजपाई गए। राजनारायण बुधौलिया वर्ष 2004 में हमीरपुर से सपा के टिकट पर सांसद बने थे। उन्होंने बसपा के अशोक चंदेल को 37 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। इसके पूर्व वर्ष 1996 में भी सपा से लोकसभा चुनाव लड़े थे, लेकिन भाजपा के गंगाचरण राजपूत से 67,980 वोटों से हार गए थे। 

बुंदेलखंड के नसीमुद्दीन बिजनौर से लड़ेंगे चुनाव
बांदा। बसपा से निष्कासन के बाद कांग्रेस के हमराही बने पूर्व कैबिनेट मंत्री और एमएलसी नसीमुद्दीन सिद्दीकी को कांग्रेस हाईकमान ने बिजनौर संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाया है। सिद्दीकी बांदा के मूल निवासी हैं। 1991 में बांदा सदर से ही बसपा के टिकट पर विधायक बने। मायावती की हर सरकार में कई-कई मंत्रालयों के कैबिनेट मंत्री रहे। करीब दो दशकों से लगातार विधान परिषद सदस्य हैं। पत्नी हुस्ना सिद्दीकी भी एमएलसी रहीं।

बेटे अफजल सिद्दीकी ने वर्ष 2014 में फतेहपुर संसदीय सीट से बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। तीन लाख वोट पाने के बाद भी भाजपा की लहर में साध्वी निरंजन ज्योति से हार गए थे। नसीमुद्दीन सिद्दीकी को बसपा ने मई 2017 में निष्कासित कर दिया था। पिछले वर्ष फरवरी में वे पत्नी और समर्थकों सहित दिल्ली में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस ने उन्हें पांच मंडलों का प्रभारी, प्रदेश चुनाव समिति का सदस्य नामित कर रखा है। चर्चा थी कि वे बांदा से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन उन्होंने खंडन किया था। अब वे बिजनौर से उम्मीदवार होंगे। 

कांग्रेस छोड़ सबको लगे झटके
बांदा। लोकसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच चल रहे दलबदल में भाजपा, सपा और बसपा को झटके लगे हैं। फिलहाल कांग्रेस को राहत है। पाला बदलने वाले चार नेताओं में दो कांग्रेस के खाते में आए हैं। सपा और भाजपा के एक-एक नेता ने दामन थामा है। भाजपा से सपा में आने वालों में प्रयागराज सांसद श्यामाचरण गुप्त शामिल हैं। सपा से कांग्रेस में जाने वालों में पूर्व सांसद बाल कुमार और सपा से भाजपा में शामिल होने वालों में पूर्व सांसद राजनारायण बुधौलिया के नाम शामिल हैं। बसपा से कांग्रेस में रामसेवक शुक्ला ने आमद दर्ज कराई है। फिलहाल मंडल में कांग्रेस के किसी नेता ने दल नहीं बदला है। ब्यूरो

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