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Banda News: करोड़ो खर्च फिर भी एक कारीगर या कारोबारी नहीं तैयार सका विभाग

Fri, 24 Oct 2025 11:40 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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फोटो- 05 बांदा उद्याेग विभाग का दफ्तर। संवाद
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बांदा। बांदा में शजर पत्थर का कारीगर व कारोबारी बनाने में उद्योग विभाग ने प्रशिक्षण के नाम पर सरकार के करोड़ों रुपये फूंक दिए। विभाग एक भी नया कारीगर व कारोबारी बनाने में सफल नहीं रहा। शायद यहीं वजह है कि विभाग को जिले में सिर्फ एक ही कारीगर व कारोबारी के अलावा और कोई नजर नहीं आता। इन्हीं कारीगर व कारोबारी को सरकार द्वारा संचालित सभी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। हर एक प्रदर्शनी में भी इन्हीं को भेजा जाता है, लेकिन जब बांदा शहर में प्रदर्शनी लगती हैं तो यही कारीगर लापता हो जाता हैं।
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जिले के केन नदी में पाए जाने वाले शजर पत्थर को ओडीओपी (एक जिला, एक उत्पाद) योजना में शामिल किया गया है। इसमें शजर पत्थर की कटिंग और प्रशिक्षण दिया जाता है। सरकार शजर पत्थर को देश विदेश में पहचान दिलाने के साथ ही यहां के बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराना चाहती है लेकिन उद्योग विभाग सरकार की इस मंशा पर पानी फेर रहा है।
जिले में करीब 1800 महिलाओं-पुरुषों और युवाओं को प्रशिक्षण देकर सरकार के करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए लेकिन विभाग एक भी कारीगर व कारोबारी तैयार नहीं कर सका। वजह कि प्रशिक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूरी की गई। दो-दो हजार व 20 हजार रुपये कीमत की शजर किट रेवड़ी की तरह बांट दी। जिसका परिणाम है कि शजर का कोई नया कारीगर व कारोबार नहीं खुल सका। लाभार्थियों के घर पर किट कबाड़ में पड़ी है।
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जिले में कुछ पुराने कारीगर थे उन्हें विभाग ने कोई तवज्जो नहीं दी। लिहाजा वह कामकाज छोड़कर घर बैठ गए। विभाग के पास मौजूदा समय में सिर्फ एक ही कारीगर व कारोबारी है जिसके पूरे परिवार को कारीगर व कारोबारी बनाकर सरकार द्वारा संचालित सभी योजनाओं का लाभ दिया गया है। बताते हैं कि विभाग के रहमोकरम से कारीगर का पूरा परिवार बैंक से लाखों रुपये का ऋण लेकर अपना कारोबार कर रहा है।
विभाग की इस करतूतों का खुलासा न हो इसलिए अधिकारी इसी कारोबारी को देश विदेश में लगने वाली प्रदर्शनी आदि में भेजते है। विभाग की बदौलत ही कारोबारी को राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

केस-1
शजर कारीगर नजीर बेग का कहना है कि जिले में अभी भी एक दर्जन से अधिक पुराने शजर कारीगर हैं। जिन्हें विभाग प्रोत्साहित नहीं करता। केवल एक ही नाम के कारीगर व कारोबारी को ही हर स्तर पर प्रोत्साहित किया जाता है। लिहाजा पुराने कारीगर घर बैठ गए। नए कारीगर तैयार नहीं हो सके।

केस-2
मयंक का कहना है कि उन्हें आदर्श बजरंग इंटर कालेज में प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण में बैठाए रखने के अलावा कुछ नहीं बताया गया। बाद में दो हजार रुपये खाते में आ गए। विभाग ने एक किट दे दी और कह दिया आप हो गए कारीगर। शजर तरासने की किट घर में पड़ी जंग खा रही है।

वर्जन-
योजना में प्रशिक्षण का दायित्व प्रदेश सरकार अपने स्तर से गैर सरकारी संगठनों को सौंपती है। इसमें हमारा कोई दखल नहीं है। रहा सवाल कि प्रदर्शनी में सिर्फ एक कारोबारी को भेजने का तो अन्य कोई जाने को तैयार ही नहीं होता है।
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गुरुदेव, उपायुक्त उद्योग

फोटो- 05 बांदा उद्याेग विभाग का दफ्तर। संवाद

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