जिले में पेयजल समस्या दूर करने के लिए बुंदेलखंड पैकेज से तैयार ग्राम समूह पेयजल परियोजना लापरवाही की भेंट चढ़ गईं। करीब दर्जन भर परियोजनाएं ट्रांसफार्मर, स्टार्टर व स्टेबलाइजर फुंकने से ठप हैं। गर्मी शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराने लगा है। कई नलकूप ध्वस्त पड़े हैं, लेकिन रिबोर न होने से पेयजल टंकियां सूखी पड़ी हैं। कमियां दूर न होने से पेयजल परियोजनाएं ग्राम पंचायतों को हैंडओवर नहीं हो पा रही हैं।
तीन दशक पहले जिले में पेयजल समस्या को देखते हुए केंद्र व प्रदेश सरकार ने 55 करोड़ 66 लाख रुपये से ग्राम समूह पेयजल परियोजना शुरू की थी। इसके तहत गांवों में एकल व ग्राम समूह पेयजल के लिए नलकूप लगे और टंकियां बनीं। पाइप लाइन डालकर ग्रामीणों को कनेक्शन दिए गए। कुछ दिन चलने के बाद योजनाएं ठप हो गईं। मकसद था ओवरहेड टैंक, नलकूप, पाइप लाइन व स्टैंड पोस्ट बनवाकर घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाना। लेकिन अब ये परियोजनाओं मामूली कमियों से पूरी तरह ठप हैं।
सूखी टंकियां ग्रामीणों को मुंह चिढ़ा रही हैं। गर्मी चढ़ते ही लोग नदियों व तालाबों से पानी लाकर पीने को मजबूर हो जाते हैं। जल निगम द्वारा यांत्रिक शाखा परियोजना प्रबंधक को भेजी ठप पेयजल परियोजनाओं की सूची से परियोजनाओं की हकीकत सामने आई। जसपुरा, कमासिन और बिसंडा ब्लाक के गांवों में करीब दर्जन पेयजल परियोजनाएं ठप हैं। कमासिन ब्लाक में धुधई ग्राम समूह पेयजल परियोजना में ट्रांसफार्मर फुंकने से नलकूप नहीं चल रहा है।
कुर्रा बुजुर्ग में नलकूप के स्टार्टर व स्टेबलाइजर खराब हैं। बंथरी में नलकूप का ट्रांसफार्मर फुंका है। बछौंधा सानी में भी कमोवेश यही स्थिति है। ममरी गांव में नलकूप का स्टेबलाइजर फुंकने से परियोजना ठप है। लोहरा गांव में ट्रांसफार्मर व स्टार्टर दोनों खराब हैं। जसपुरा ब्लाक स्थित गाजीपुर गांव में नलकूप ध्वस्त है। यहां रिबोर की जरूरत है। चंदवारा गांव में पेयजल परियोजना को अभी तक कनेक्शन नहीं मिला। गौरी खुर्द गांव में नलकूप का मोटर फुंका है। नरौली में स्टार्टर व मोटर फुंकने से लोग पानी को तरस रहे हैं। बिसंडा ब्लाक में सिंहपुरमाफी ग्राम समूह पेयजल परियोजना स्टार्टर खराब होने से चालू नहीं हो पा रही है।
इन पेयजल परियोजनाओं का संचालन व अनुरक्षण अभी जल निगम 16वीं शाखा कर रही है। जल निगम एक्सईएन अंचल कुमार गुप्ता ने यांत्रिक शाखा परियोजना प्रबंधक रामनिवास को ठप पेयजल परियोजनाओं की सूची भेजी है। उन्होंने कहा कि कमियां दूर करने के लिए कई बार अनुरोध किया गया, पर खेद है कि इस पर अमल नहीं किया गया। योजनाएं चालू कराने में कोई रुचि नहीं ली जा रही है। शासन-प्रशासन में विभाग की किरकिरी हो रही है।
ग्रामीणों की शिकायत पर उच्चाधिकारियों के बार-बार पत्र आ रहे हैं। इंगित कमियों को तत्काल दुरुस्त कराएं। इसके बाद सिविल संबंधी कमियों को दूर कर पेयजल योजना पूरी क्षमता से चालू कर ग्राम पंचायतों को हैंडओवर करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने यह सूची सीडीओ व डीएम को भी भेजी है। जिले में लगाए गए हैंडपंपों में वैक्टीरियल जांच होगी। इसके लिए शासन ने फील्ड किट भेजे हैं। जल निगम को हैंडपंपों में पानी की जांच के लिए 26 हजार किट मिले हैं। ब्लाकों में हैंडपंप की संख्या के अनुसार फील्ड किट भेजवाए जा रहे हैं। एक्सईएन अंचल गुप्ता ने जिला विकास अधिकारी से इस बाबत जरूरी दिशा-निर्देश जारी करने व कार्रवाई का अनुरोध किया है।