प्रशासन ने शहर के खांईपार मोहल्ले में स्थित स्लॉटर हाउस (बूचड़खाने) के पुराने भवन को बंद करा दिया है। खाद्य अभिहित अधिकारी का कहना है कि स्लाटिंग (पशु वध) का यहां कोई लाइसेंस न होने पर ये कार्रवाई की गई है। उधर, धार्मिक स्थलों और स्कूल-कॉलेजों के नजदीक चल रहीं चिकन और मटन मीट की 8 दुकानों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई करते हुए उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं।
मंडल मुख्यालय बांदा शहर में जगह-जगह आधा सैकड़ा से ज्यादा मटन (बकरा), चिकन (मुर्गा) और बीफ (भैंस) मीट की दुकानें हैं। यह सभी कार्रवाई के घेरे में हैं। खाद्य एवं औषधि विभाग के अभिहित अधिकारी चंद्रशेखर मिश्रा ने बताया कि आठ दुकानदारों के लाइसेंस निरस्त करने का नोटिस दिया है।
इनमें चार पद्माकर चौराहा के हैं। इन दुकानों में मटन या मुर्गा न काटने की भी चेतावनी दी गई है। अभिहित अधिकारी ने बताया कि खांईपार स्थित स्लॉटर हाउस के भवन को बंद कर दिया गया है। यहां किसी भी तरह का मीट कारोबार अवैध होगा। यहां मानक न पूरा करने वाले दुकानदारों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जा रही है।
‘लाइसेंस के लिए पिछले साल 500 रुपये फीस जमा की थी। अब तक लाइसेंस नहीं बना। अब अधिकारियों ने दुकान आकर मानक पूरा करने की बात कही है’। सबी हैदर (चिकन विक्रेता)। ‘प्रशासन की कार्रवाई से हमारा कारोबार औंधेे मुंह गिरा है। ग्राहक नहीं आ रहे हैं। एकदम से इतनी सख्ती किया जाना बेरोजगारी को बढ़ाना है। सरकार और प्रशासन को सुधार की मोहलत देनी चाहिए’। बाबूलाल उर्फ बल्लू (मटन विक्रेता)।
‘90 साल से होटल किए हुए हैं। तब से लगातार बिना किसी अड़चन के बीफ का मीट बेचते रहे हैं। अब इस पर रोक लगा दी गई है। हमारे साथ होटल में काम करने वाले नौकर भी बेरोजगार हो रहे हैं। ग्राहकों का टोटा पड़ रहा है’। हिकमत उल्ला (होटल व्यवसायी)