बांदा। भारी बारिश से खरीफ फसलों के नुकसान के बाद किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने मंगलवार को नवीन मंडी में किसान महापंचायत की।
राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि फसलें बर्बाद होने से किसान आर्थिक संकट में हैं। महापंचायत के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भेजा गया।
भाकियू ने बांदा को आपदाग्रस्त घोषित कर किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग की। बीमा कंपनियों से फसल नुकसान का दावा दिलाने की भी मांग की गई। बुंदेलखंड के किसानों का कर्ज माफ करने की मांग भी रखी गई। इसके अलावा, बिजली, राजस्व और चकबंदी से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग की गई।
किसानों ने सिंचाई के लिए कम से कम 18 घंटे निर्बाध बिजली देने की मांग की। घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली और स्मार्ट मीटर हटाकर पुराने मीटर लगाने की मांग भी रखी।
विद्युत भार बढ़ाने से पहले उपभोक्ता की सहमति लेने की मांग की गई। गलत तरीके से बढ़े भार के बिल दुरुस्त कराने की भी मांग रखी गई। लोहरा, अमलीकौर, सिलेहटा, बंहिगा, खप्टिहा खुर्द और महबरा सहित छह गांवों में चकबंदी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई।
बिना काम पूरा किए चक सीमांकन और कब्जा परिवर्तन से संबंधित सूचनाएं निरस्त करने तथा दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग भी रखी गई। खतौनी में अंश निर्धारण की गलतियां सुधारने के लिए लंबित प्रार्थनापत्रों पर कार्रवाई की मांग भी रखी गई।
एक्सप्रेसवे पर किसानों के वाहनों को टोल से छूट
भाकियू ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के टोल नाकों पर किसानों के ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल और अन्य वाहनों से टोल समाप्त करने की मांग की। राजस्व संहिता की धारा 222 के तहत बुंदेलखंड में तीन हेक्टेयर तक भूमि वाले किसानों को लघु-सीमांत किसान के दायरे में लाने की मांग भी की गई। महापंचायत में जिला अध्यक्ष अवधेश सिंह पटेल समेत किसान नेता मौजूद रहे।