खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ड्रग इकाई द्वारा टेस्टिंग के लिए भेजी गई 42 दवा कंपनियों के नमूनों में 15 नकली पाई गई हैं। इनमें कमजोर व कुपोषित शिशुओं को दिया जाने वाला ग्राइप वाटर भी शामिल है।
बाजार में मेडिकल स्टोरों से लेकर सरकारी अस्पतालों तक घटिया व नकली दवाओं की भरमार है। नामी कंपनियों की हूबहू पैकिंग में नकली दवाएं पैक हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ड्रग इकाई द्वारा टेस्टिंग के लिए भेजी गई दवाओं के सैंपल की रिपोर्ट में ये सनसनीखेज तथ्य सामने आए हैं।
विटामिन, एंटीबायोटिक से लेकर जीवन रक्षक दवाएं तक नकली और मिलावटी खपाई जा रही हैं। छह महीने पहले भेजे गए 42 सैंपलों की जांच में 15 नकली पाई गईं। इस खुलासे के बाद ड्रग विभाग चौकन्ना हो गया है। शासन के आदेश पर नकली दवा कारोबरियों पर नकेल कसने को जल्द अभियान छेड़ने की तैयारी है।
क्षेत्रीय औषधि नियंत्रक, इलाहाबाद डॉ.अवधेश प्रसाद कहते हैं कि जीवन
रक्षक व एंटीबायोटिक दवाओं में मिलावट पाई गई है।
फर्जी रैपर लगाकर नकली
दवा बेचने का भी मामला सामने आया है। ऐसे मेडिकल स्टोर संचालकों व दवा
कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। इन पर जल्द शिकंजा कसा
जाएगा। एफआईआर न होने की वजह से इनका खुलासा नहीं किया जा रहा है।
खड़िया और सेक्रीन की मिलावट
ड्रग इकाई ने एक अप्रैल से 31 जनवरी तक 95 दवाओं के नमूने सील बंद कर प्रयोगशाला में जांच को भेजे। इनमें 40 नमूनों की जांच रिपोर्ट आ गई है।
लैब रिपोर्ट बताती है कि इनमें खांसी के लिए बोकार्ड लिमिटेड कंपनी का जीडेक्स कफ सीरप, एरियोन हेल्थ केयर का टापडेक्स कफ लिंटस, मेडिकल प्रोडेक्ट आफ कंपनी का डर्मोलीन स्किन क्रीम, रोमबस फार्मा प्राइवेट लिमिटेड की फुलसरेन टेबलेट, फार्मा सिंटा लिमिटेड कंपनी का मैंगोजिल ओजिट संपेगन सीरप, हिलियस फार्मासिटी कंपनी का एलोडीजिन टेबलेब, मेरेडियन इंटर प्राइजेज की ट्रेडएल एससे टेबलेट, हेल्थ केयर का सिनकाम ग्राइप वाटर शामिल हैं। किसी में खड़िया तो किसी में सेक्रीन का मिश्रण है।
सरकारी अस्पतालों की 35 फीसदी दवाएं घटिया
नकली दवा कंपनी निर्माताओं के गुर्गों का गठजोड़ मेडिकल एजेंसियों, मेडिकल स्टोरों से लेकर सरकारी अस्पतालों तक है। ड्रग विभाग की मानें तो फेल आए सैंपलों में कई जिला अस्पताल के दवाओं के भी हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदी जाने वाली 35 फीसदी दवाएं घटिया होती हैं।
यही वजह है कि सरकारी अस्पतालों की दवाओं से ज्यादातर मरीजों को आराम नहीं मिलता। उधर, मेडिकल स्टोरों में गांवों के कम पढ़े लोगों को ऐसे ही घटिया दवाएं पकड़ाई जाती हैं। इसके एवज में मेडिकल स्टोर संचालकों की भी मोटी कमाई होती है। सैंपल ऐसे दुकानों के फेल हुए हैं, जहां सुबह से देर रात तक ग्राहकों की भीड़ रहती है। इनमें सब्जी मंडी के आसपास के नामी मेडिकल स्टोर भी शामिल हैं।
सीरप निर्माता की एफआईआर
बांदा। जीवन रक्षक दवाओं की तरह कास्मेटिक की बिक्री में जमकर मिलावटखोरी की जा रही है। जांच रिपोर्ट में दो पाउडर, एक क्रीम और लोशन में भी मिलावट पाई गई है। ड्रग इंसपेक्टर आशुतोष मिश्रा ने बताया कि जल्द ही जांच टीम गठित कर कास्मेटिक दुकानों में छापामार अभियान चलाया जाएगा।
यूलीक्लेम ड्राई सीरप निर्माता एसक्यूस्थ कंपनी मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। जल्द ही अन्य के खिलाफ भी मुकदमा कायम होगा।