बांदा। बकरी कारोबारियों को बंधक बनाकर 50 हजार रुपये फिरौती मांगने के जुर्म में दो दोषियों को अदालत ने सात वर्ष की कैद और जुर्माना से दंडित किया है। तीसरे अभियुक्त को सिर्फ एक धारा में दोषी पाते हुए एक वर्ष जेल और जुर्माना की सजा सुनाई गई। इस मुकदमे का फैसला तीन वर्ष बाद हुआ। कमासिन थाना क्षेत्र के पछौंहा गांव के राज कुमार पुत्र मोतीलाल खटिक ने पहली सितंबर 2013 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह बकरी का व्यापारी है। थाना क्षेत्र के जगऊटोला के मजरा लखनपुर से कुछ बकरियां खरीदी थीं। 30 अगस्त 2013 को इन्हें लेने के लिए उसके पुत्र प्रमोद व सुखराम पिकअप से गए थे। रात 8 बजे प्रमोद ने मोबाइल पर सूचना दी कि तीन बदमाशों ने खमरखा रोड पर पुलिया के पास वाहन रोक लिया और उन्हें व चालक सुरेश कुमार को बंधक बना लिया। 50 हजार रुपये की मांग की।
पुलिस ने फायरिंग कर तीनों बंधकों को मुक्त करा लिया। बदमाश फरार हो गए। प्रमोद ने पुलिस को बताया कि जगऊटोला (कमासिन) गांव के मजरा निवासी रामराज पुत्र माता प्रसाद यादव उसके साथ वाहन पर बैठकर आया था। उसी ने पिकअप खमरखा रोड पुलिया के पास रुकवाई थी। रामराज का रिश्तेदार छोटेलाल पुत्र सुखनंदन यादव निवासी ओरा (पहाड़ी, चित्रकूट) व चंद्रशेखर पुत्र चंद्रभवन यादव निवासी बारामाफी (पहाड़ी, चित्रकूट) ने यह घटना की। पुलिस ने तीनों अभियुक्तों के खिलाफ धारा 342, 387, 394, 307 आईपीसी व एससीएसटी एक्ट की रिपोर्ट दर्ज कर ली। विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन अधिकारी ने आठ गवाह पेश किए। विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) हरिनाथ पांडेय ने शनिवार को फैसला सुनाया। अभियुक्त छोटेलाल व चंद्रशेखर को धारा 394 में 7-7 वर्ष की कैद व 5-5 हजार रुपये जुर्माना और धारा 387 में 4-4 वर्ष कारावास व 2-2 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। धारा 307, 342 व एससीएसटी एक्ट में दोषमुक्त कर दिया। अभियुक्त रामराज को धारा 342 में एक वर्ष की जेल व 500 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। धारा 387, 394, 307 व एससीएसटी एक्ट में दोष मुक्त कर दिया।