बांदा। शहर के मुख्य बाजार के बीच स्थित सब्जी मंडी
की आग में 376 छोटे-बड़े दुकानदारों को सड़क पर ला दिया है। नुकसान इतना
जबर्दस्त है कि सोमवार को पूरे दिन राजस्व विभाग के लेखपाल आंकलन पूरा नहीं
कर सके। उधर, मंडी की आग में सियासी रोटियां सेंकी जा रही हैं।
राजनीतिक
दलों के नेता इसे मुद्दा बनाकर प्रशासन को निशाने पर ले रहे हैं।
अग्निकांड पीड़ितों से हमदर्दी जताने की होड़ है। पीड़ित सब्जी विक्रेताओं
ने रविवार को मंडी के पास मुख्य सड़क पर धरना देकर प्रदर्शन किया। देर शाम
सपा नेता हसन सिद्दीकी के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर
रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की।
रविवार की रात पुरानी सब्जी मंडी एक
बार फिर जलकर राख हो गई। पहले भी चार बार यह मंडी आग की भेंट चढ़ चुकी है।
देर रात आग पर काबू पाया गया। जल संस्थान ने 17 टैंकर पानी भेजा। फायर
ब्रिगेड के दो टैंकर आग बुझाते रहे। सोमवार की सुबह मंडी की बर्बादी का
नजारा दिल दहला देने वाला था।
चारों तरफ मलबा, जली और अधजली सब्जी,
जिंदा जल मरीं मुर्गियां, फर्नीचर, लट्ठे, बांस, अधजली बल्लियां बिखरी
थीं। सिर पर हाथ रखकर मातम की मुद्रा में बैठे सब्जी विक्रेता बयां कर रहे
थे कि चंद घंटे की आग ने कितने परिवारों को उजाड़ दिया। सब्जी मंडी में
पहले भी कई बार आग लग चुकी है। हर बार इसे साजिश बताया गया है। भूमि मालिक
पर उंगलियां उठती रही हैं। अबकी भी वही आरोप हैं।
सदर तहसीलदार संत
कुमार ने कहा है कि सब्जीमंडी अग्निकांड पीड़ितों को कोई अहेतुक सहायता
नहीं मिलेगी। यह दैवी आपदा में शामिल नहीं है। उन्होंने बताया कि लेखपाल
रामशरन, संतोष यादव और धर्मराज कुशवाहा को लगाकर अग्नि पीड़ितों की सूची
तैयार की गई है। नुकसान का आंकलन किया जा रहा है।
यह सूची
जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। वे चाहेंगे तो मुख्यमंत्री से मदद के लिए
अनुरोध कर सकते हैं। शासन या मुख्यमंत्री कोई मदद स्वीकृत करेंगे तो जरूर
दी जाएगी।