बांदा। स्नातक छात्र ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। परिजन घटना की वजह आर्थिक तंगी बता रहे हैं। मौके से मिले सुसाइड नोट से घटना की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी। नरैनी क्षेत्र के लहुरेटा गांव निवासी सुशील कुमार निगम यहां मेडिकल कॉलेज में प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड है और परिवार सहित अलीगंज अतर्रा रोड में शांति गुप्ता के मकान में रह रहा है।
उसके साथ छोटा पुत्र सिद्धांत भी सिक्योरिटी गार्ड है। उसका 19 वर्षीय पुत्र शिवम निगम ने आरएस सद्गुरु महाविद्यालय, जबरापुर (फतेहगंज) में इस वर्ष बीएससी प्रथम वर्ष की परीक्षा दी थी। मंगलवार को उसकी मां मायके रतनतारा (छतरपुर) गई थी। पिता व छोटा भाई ड्यूटी में थे। शिवम घर में अकेला था।
बुधवार को सुबह देर तक न उठने पर मकान मालिक ने आशंका होने पर शिवम के पिता को फोन किया। पुलिस को भी सूचना दी गई। पुलिस ने दरवाजे की कुंडी तोड़कर शव फांसी के फंदे से उतारा। उसने सीलिंग फैन में अंगोछा बांधकर फांसी लगाई थी।
पुलिस ने पंचनामा कर शव का पोस्टमार्टम कराया। पुलिस के मुताबिक घटना स्थल पर सुसाइड नोट मिला है। हालांकि इसमें आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो रही है। उधर, पिता का कहना है कि शिवम पढ़ने में होशियार था और आईएस बनना चाहता था। शायद घर में आर्थिक तंगी से ख्वाहिश पूरी न होते देख उसने जान दे दी।
जाते-जाते मुझे बदनाम न करना
बांदा। फांसी पर जान गंवाने वाले स्नातक छात्र ने सुसाइट नोट में कहा है कि दुनिया वालो मैं एक अच्छा इंसान तो नहीं बन पाया, लेकिन जाते-जाते मुझे बदनाम न करिएगा। मेरे पापा महात्मा गांधी से कम नहीं हैं। मम्मी बहुत अच्छी हैं। छोटे भाई सिद्धांत को कहा है कि जो मैं नहीं कर पाया तुम करना। मेरा सपना आईएस बनना था। मैं नहीं बन पाया। तुम आईएएस बनना और मम्मी पापा को खुश रखना।