उत्तर प्रदेश जल निगम 16वीं शाखा के अधिशासी अभियंता का शव यहां उनके सरकारी आवास पर फांसी के फंदे पर लटका मिला। फौरीतौर पर इसे आत्महत्या का मामला समझा जा रहा है। हालांकि घटना स्थल की परिस्थितियां संदेह पैदा कर रही हैं।
अधिशासी अभियंता केशवलाल (50) पुलिस लाइन के नजदीक स्थित अपने कार्यालय से चंद कदम दूर बने सरकारी आवास में अकेले रहते थे। उनका परिवार नैनी (इलाहाबाद) में रहता है। शनिवार को वह शहर के सब्जी मंडी-छावनी सड़क पर डाली जा रही सीवर लाइन का काम देखते रहे। शाम को घर लौटे।
रविवार को सुबह रोजमर्रा की तरह उनका नौकर रंजीत उर्फ कल्लू (निवासी सिविल लाइन, बांदा) खाना बनाने आया तो दरवाजे बंद थे। काफी देर खटखटाने के बाद भी दरवाजे नहीं खुले। बकौल कल्लू वह यह सोचकर लौट गया कि शायद साहब सो रहे हैं। शाम चार बजे वह चाय बनाने फिर आया तब भी दरवाजे बंद थे।
अधिशासी अभियंता के मोबाइल पर कॉल करने से घंटी बजती रही। रंजीत ने विभागीय अवर अभियंता रोहित कुमार राणा को फोन पर सूचना दी। राणा तत्काल एक्सईएन के आवास आ गए और फोन से अपने अन्य विभागीय साथियों तथा सिविल लाइन चौकी प्रभारी को सूचना दी।
रात करीब आठ बजे नगर क्षेत्राधिकारी विनोद सिंह और कोतवाली प्रभारी रनवीर सिंह भी मौके पर आ गए। कोतवाली प्रभारी ने बंद दरवाजे को लात मारकर खोला। अंदर अंधेरा था। लाइट जलाने पर देखा कि कमरे के सीलिंग फैन पर नायलोन की दोहरी रस्सी से अभियंता का शव लटक रहा था। पैर जमीन से छू रहे थे।
पैरों से सटे हुए डबल बेड की चादर इत्यादि पर कोई सिलवट आदि नहीं थी। पैरों के नजदीक रखी मेज भी सीधी थी। पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। साथ ही परिजनों को फोन पर सूचना दी। फिंगर प्रिंट विशेषज्ञ टीम ने भी कमरे में रखे सामान की जांच की। कोई सुसाइड नोट फिलहाल नहीं मिला है।
पुलिस ने मोबाइल कब्जे में ले लिया है। उधर, क्षेत्राधिकारी ने बताया कि नौकर रंजीत के मुताबिक अधिशासी अभियंता को कुछ दिन से गले में तकलीफ थी। वह धीमी आवास से बोलते थे। उन्होंने कहा कि जांच की जा रही है। मृतक अधिशासी अभियंता ने पिछले वर्ष जुलाई में यहां ज्वाइन किया था। खबर मिलते ही बड़ी संख्या में जल निगम कर्मचारी वहां पहुंच गए।