नरैनी। 12 दिनों तक बदमाशों तक कब्जे में रही एएनएम रानी देवी ने खुलासा किया है कि जिस बोलेरो पर उसका अपहरण किया गया था उस पर भाजपा का स्टीकर लगा था। उसे अपहरण के अगले ही दिन झांसी जनपद ले जाया गया। जंगल में वह अज्ञात स्थल पर किसी वृद्ध की निगरानी में रही। शनिवार की रात मऊरानीपुर (झांसी) में बदमाशों के चंगुल से रिहा होने के बाद रविवार की देर रात अपने गृह नगर करतल आई एएनएम रानी देवी ने बताया कि बदमाश उसे 20 सितंबर को तड़के चार बजे प्रसव कराने के बहाने ले गए। पति महेश साथ में थे। उन्हें तमंचा अड़ाकर हाथ-पैर बांधकर डाल दिया। नरैनी की ओर ले जाकर किसी गांव से होते हुए कालिंजर की ओर ले गए।
वहां से मध्य प्रदेश के पाथर कछार के रास्ते से बदौसा, अतर्रा, बांदा, महोबा होते हुए शाम करीब 4 बजे मऊरानीपुर के डिबकई मौजा टोला (गरौंठा) के जंगल में ले जाया गया। वहां एक बाबा और अर्द्ध विक्षिप्त लड़के की सुपुर्दगी में उसे सौंपकर तीन बदमाश चले गए। एएनएम के मुताबिक वह 11 दिनों तक यहीं रही। नजदीक में बहने वाले नाले में नहाना धोना करती थी। खाना कहीं से बनकर आता था। निगरानी करने वाला बाबा मोबाइल फोन से उसकी बात घर वालों से कराता था। रानी ने यह भी बताया कि रास्ते में उसे कोई नशीली दवा पिला दी गई थी। इससे वह अर्द्ध बेहोशी अवस्था में हो गई।
रानी देवी ने बताया कि उसे जंगल से मऊरानीपुर रेलवे स्टेशन जिस बोलेरो में लाया गया उसमें भाजपा का स्टीकर लगा था। यही बात नरैनी कोतवाली प्रभारी मुन्नीबाबू निरंजन ने भी बताई। उन्होंने बताया कि पहली अक्तूबर को शाम 7 बजे वह टीम के साथ मऊरानीपुर से गरौंठा जा रहे थे। क्योंकि सर्विलांस पर यहीं की लोकेशन मिल रही थी। रात करीब साढ़े 9 बजे एक बोलेरो तेज रफ्तार से निकली। संदेह होने पर उन्होंने अपनी जीप मोड़कर बोलेरो के पीछे लगा दी। कोतवाली प्रभारी के मुताबिक बोलेरो के पीछे भाजपा का स्टीकर लगा था। मऊरानीपुर रेलवे स्टेशन के पास बोलेरो सवार लोगों ने एएनएम को तेजी से नीचे उतारा भाग गए। कोतवाली प्रभारी के मुताबिक उनके साथ झांसी की एसटीएफ भी लगी हुई थी। पुलिस के दबाव से ही बदमाशों ने एएनएम को रिहा किया है। 20 लाख रुपये फिरौती के बाद रिहाई की बात पर कोतवाली प्रभारी ने इससे अनभिज्ञता जताई। एएनएम का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद पुलिस ने उसे परिजनों को सौंप दिया।