पिपरहरी। आठ बीघे में मात्र 40 किलो मटर की पैदावार के सदमे ने किसान की जान ले ली। उस पर बैंक और साहूकारों का लगभग डेढ़ लाख रुपये का कर्ज था। एसडीएम ने जांच के आदेश दिए हैं। उधर, उरई जिले के मगरौल गांव में एक किसान ने फसल खराब होने पर फांसी लगाकर जान दे दी।
पैलानी तहसील क्षेत्र के निवाइच गांव में चंद्रपाल सिंह (70) पुत्र बाबू सिंह ने आठ बीघा खेत में मटर बोई थी। शेष चार बीघा जमीन सिंचाई के अभाव में परती पड़ी रही। मटर की फसल कटने के बाद शनिवार की रात वह खलिहान में थ्रेसिंग कराने गया था। आठ बीघे जमीन पर मात्र 40 किलो फसल देखकर उसे गहरा सदमा लगा। वहीं दिल का दौरा पड़ गया। आसपास मौजूद लोगों ने उसे घर पहुंचाया। कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई।
चचेरे भाई भान सिंह ने बताया कि मृतक पर इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक पपरेंदा शाखा से किसान क्रेडिट कार्ड का एक लाख रुपये कर्ज था। 50 हजार रुपये साहूकारों से ले रखा था। एसडीएम पुष्पराज सिंह ने बताया कि तहसीलदार और लेखपाल को गांव भेजकर जांच के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट मिलने पर नियम के मुताबिक सरकारी मदद दिलाई जाएगी। घटना की सूचना पैलानी थाना पुलिस को भी दी गई है।
कालपी प्रतिनिधि के अनुसार मगरौल निवासी किसान महावीर पुत्र शंकर के पास डेढ़ बीघा जमीन है। इस साल सूखा व ओलावृष्टि से फसल नष्ट हो गई थी। प्रशासन की ओर से भी उसे कोई मदद नहीं मिली। इसी सदमे में महावीर ने रविवार को घर में कमरे में फांसी लगा ली। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पाकर कोतवाली पुलिस व नायब तहसीलदार घटनास्थल पर पहुंचे। परिजनों का कहना है कि फसल खराब होने के सदमे से महावीर काफी परेशान था। घर में किसी से बात भी नहीं कर रहा था। इस पर उसने फांसी लगा ली।