डीआईजी ने अपराध समीक्षा बैठक में एक बार फिर मातहतों के पेंच कसे। उन्होंने गुंडाएक्ट व एनएसए के मामलों की समीक्षा में लापरवाही पाए जाने पर थानाध्यक्षों को चेताया। उन्होंने कहा कि अपहृत हुई किशोरियों, युवतियों और महिलाओं की शीघ्र तलाश कर आरोपियों को जेल भेजा जाए।
सर्किट हाउस में बुधवार को डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी ने चेंज मैनेजमेंट कार्यशाला को संबोधित किया। कहा कि यह योजना वर्ष 2006 में लागू की गई थी। इस समय 1500 से ज्यादा थानों, कार्यालयों और पुलिस अफसरों के दफ्तरों को ऑनलाइन जोड़ा गया है।
भविष्य में जनता को थाना व कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। आगे से शिकायत, शस्त्र, पासपोर्ट, चरित्र सत्यापन, एफआईआर, खोई हुई संपत्ति आदि के संबंध में आनलाइन कार्रवाई की जाएगी। अपराधों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि पुरानी रंजिश के मामलों को चिह्नीकरण कर उनमें निरोधात्मक कार्रवाई की जाए।
पुरानी रंजिश में यदि कोई हत्या या अन्य वारदात होती है तो इसके लिए सीधे सर्किल के सीओ व थानाध्यक्ष जिम्मेदार होंगे। बैठक में एसपी राकेश शंकर (बांदा), पवन कुमार (चित्रकूट), कुंतल किशोर (महोबा) व दिनेश पाल सिंह (हमीरपुर) के अलावा अपर एसपी व सीओ और थानाध्यक्ष शामिल रहे।