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जंगली जानवरों व मवेशियों को पानी का संकट

Wed, 27 May 2015 12:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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सरकारी आंकड़ों में 50 फीसदी तालाब को पानी से भरा हुआ बताया गया है। इनमें ऐसे गांव भी शामिल हैं, जहां नहर नहीं है। वहां के पंप भी खराब पड़े हैं। जबकि जहां नहर हैं वहां तालाबों के भरने से पहले ही उसका पानी उतर गया। ऐसे में विभाग के दावों की हवा निकल रही है।
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गर्मी शुरू होते ही जिला प्रशासन ने सभी खंड विकास अधिकारियों को एडीओ पंचायत व पंचायत सचिव के माध्यम से तालाबों में पानी भरवाने और उसकी रिपोर्ट भेजने को कहा था। ब्लाकों से जिला विकास अधिकारी कार्यालय को भेजे गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं।

सभी ब्लाकों से मिली रिपोर्ट में 2098 तालाबों में 1080 पानी से भरे दिखाए गए हैं। जसपुरा ब्लाक में 106 तालाबों में 58 को पानी से भरा बताया गया है। बिसंडा ब्लाक में 239 में मात्र 60 तालाब ही सूखे हैं। बड़ोखर खुर्द ब्लाक में 180 में 109, महुआ में 315 में 180, नरैनी में 301 में 99, बबेरू में 299 में 174, कमासिन में 262 मेें 138 और तिंदवारी ब्लाक में 355 में 143 तालाब पानी से भरे दिखाए गए हैं।
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ब्लाकों से मिले ये आंकड़े हवाई लग रहे हैं, क्योंकि इस बार किसी भी नहर में इतना पानी नहीं आया जिससे उस क्षेत्र के पचास फीसदी तालाब भरे जा सकें। अतर्रा और बांदा ब्रांच की नहरें करीब-करीब सूखी दिखाई दीं। जौहरपुर पंप कैनाल में दो किलोमीटर से आगे कभी पानी नहीं पहुंचता।

इसके अलावा जिले में 537 राजकीय नलकूपों में ज्यादातर ने गर्मी में दगा दे दिया है। करबई, हथौरा, परास, बरेठी, बंबिया, हरदौली, पलरा, बरौली आजम व पाली गांवों में लगे राजकीय नलकूप बिजली आपूर्ति न होने से ठप हैं। जखनी, दहरिया, नरजिता (जसपुरा), सुनहुला, पिपरहरी व बेंदा के नलकूपों में यांत्रिक खराबी है। ये तो विभागीय आंकड़े हैं। वास्तविकता में 100 से ज्यादा राजकीय नलकूप ठप हैं।

बता दें कि भौगोलिक स्थिति व जलवायु के मुताबिक जिले में फरवरी से मार्च माह के बीच यहां 60 फीसदी तालाब सूख जाते हैं। मई माह में 10 फीसदी से अधिक तालाबों में पानी की एक बूंद नहीं बचती।
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